प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सतत मार्गदर्शन से सोमवार को भारत के जल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया. नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में राजस्थान और हरियाणा के बीच बहुप्रतीक्षित यमुना जल समझौते पर ऐतिहासिक हस्ताक्षर किए गए. लगभग तीन दशकों (30 साल) से लंबित पड़ी यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है. लगभग 34,102 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी.
इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विशेष रूप से उपस्थित रहे.
डबल इंजन सरकार की इच्छाशक्ति से सुलझा पुराना विवाद
यह समझौता केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आपसी समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण है. राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की सराहना करते हुए कहा कि देश में जल सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. उन्होंने कहा कि जिस तरह नर्मदा परियोजना, जल जीवन मिशन और केन-बेतवा लिंक परियोजना ने देश की तस्वीर बदली है, उसी तरह यह यमुना जल परियोजना भी मरुधरा के लिए जीवनदायिनी साबित होगी. मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री अमित शाह का विशेष आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने दोनों राज्यों के बीच संवाद और विश्वास का सेतु बनकर इस जटिल विवाद का स्थायी समाधान निकाला है.

किन-किन नदियों और नहरों से जुड़ा है दोनों राज्यों का भूगोल?
हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी का रिश्ता बेहद पुराना है. दोनों राज्यों के बीच साझा जल तंत्र की बात करें, तो यमुना नदी और घग्गर नदी मुख्य प्राकृतिक स्रोत हैं, जो दोनों राज्यों की सीमाओं के आसपास से होकर गुजरती हैं या प्रभाव डालती हैं. इसके अलावा, कृत्रिम जल स्रोतों में पश्चिमी यमुना नहर, भाखड़ा नहर प्रणाली और गुड़गांव नहर (जिसे अब बुढ़िया नाला/लिंक चैनल भी कहते हैं) दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे और सिंचाई का मुख्य जरिया रही हैं. इस नए समझौते के बाद अब यमुना नदी के सरप्लस पानी को सीधे राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुंचाया जा सकेगा.
इस परियोजना से हजारों गांवों के लाखों लोगों का होगा भला
इस दूरदर्शी परियोजना से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र (चूरू, झुंझुनूं और सीकर) सहित पांच बड़े जिलों के लाखों लोगों का भला होगा. इन इलाकों में लंबे समय से ग्राउंड वाटर (भूमिगत जल) का स्तर काफी नीचे चला गया था और पानी खारा हो चुका था. इस परियोजना के जरिए लाखों ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा. खास बात यह है कि इस परियोजना के तहत केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि हरियाणा के भी 10 चिन्हित स्थानों पर पीने का साफ पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे दोनों राज्यों की जनता को समान रूप से लाभ मिलेगा.
कैसा होगा यमुना जल परियोजना का आधुनिक ढांचा?
यमुना जल परियोजना के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो इसके तहत राजस्थान के हिस्से का 577 एमसीएम (MCM) यमुना जल हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से लिया जाएगा. इस पानी को लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी एक विशाल भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के माध्यम से राजस्थान के चूरू जिले में स्थित हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा.
तीन समानांतर भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी
इस मेगा प्रोजेक्ट के अंतर्गत 3.6 मीटर व्यास (डायमीटर) की तीन समानांतर भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी. इसके साथ ही आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली और कृत्रिम जलाशयों का निर्माण किया जाएगा. राजस्थान सरकार ने इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर केंद्रीय जल आयोग के पोर्टल पर अपलोड कर दी है और हरियाणा सरकार ने भी पाइपलाइन के रास्ते (अलाइनमेंट) को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए ‘राजस्थान हरियाणा यमुना वाटर परियोजना-एसपीवी’ का गठन किया जाएगा, जो इसके निर्माण और संचालन की पूरी निगरानी करेगी.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



