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‘हिमालय की जीवंत ऊष्मा’: CM पुष्कर धामी पर लिखी पुस्तक का विमोचन, आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा– यह कृतित्व से व्यक्तित्व निर्माण की गाथा

उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के सार्वजनिक जीवन पर एक प्रेरणादायक पुस्तक आई है— ‘हिमालय की जीवंत ऊष्मा’. इसे “कृतित्व से व्यक्तित्व निर्माण की गाथा” बताते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) ने मुख्यमंत्री को बधाई दी.

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Edited by Sahil Singh

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सार्वजनिक जीवन और जीवन यात्रा पर आधारित एक प्रेरणादायी पुस्तक “हिमालय की जीवंत ऊष्मा” का विमोचन आज राजभवन देहरादून में धूमधाम से संपन्न हुआ. राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की सरपरस्ती में आयोजित इस समारोह में युवा लेखिका संभावना पंत द्वारा रचित इस कृति ने सभी का दिल जीत लिया. आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस अवसर पर पुस्तक को “कृतित्व से व्यक्तित्व निर्माण की गाथा” करार देते हुए मुख्यमंत्री धामी को हार्दिक बधाई दी.

समारोह के दौरान राज्यपाल महोदय की उपस्थिति में पुस्तक का विमोचन किया गया, जो आधुनिक युग में युवा लेखकों की समाज जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने वाली भूमिका को रेखांकित करता है.

किताब को एक प्रेरक कथा बताया

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ट्वीट कर कहा, “युवा लेखिका संभावना पंत के कलम के प्रयास की सराहना करते हुए मैं उत्तराखण्ड के लोकप्रिय और कर्मयोगी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी को आत्मीय बधाई.” उन्होंने इसे हिमालय की जीवंत ऊर्जा से प्रेरित एक प्रेरक कथा बताया, जो मुख्यमंत्री के व्यक्तित्व को नई ऊंचाइयों पर ले जाती है.

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस शुभ अवसर को “आत्मीय और आनंददायक बेला” करार देते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, पूर्व राज्यपाल बीएस कोश्यारी और पूज्य स्वामीजी को धन्यवाद दिया.

‘हिमालय की जीवंत ऊष्मा’

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने किताब के बारे में बताये हुए लिखा, “राजभवन ‘देहरादून’ में आज माननीय राज्यपाल जी की सरपरस्ती में, युवा लेखिका संभावना पंत द्वारा रचित. पुस्तक ‘हिमालय की जीवंत ऊष्मा’ का विमोचन करने के शुभ अवसर की आत्मीय और आनंद दायक बेला”.

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यह पुस्तक न केवल मुख्यमंत्री धामी के संघर्षपूर्ण सफर को उजागर करती है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को भी प्रतिबिंबित करती है. युवा लेखकों के इस योगदान से प्रेरित होकर आचार्य प्रमोद ने समाज में सकारात्मक बदलाव की अपील की. समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने पुस्तक की सराहना की और इसे राज्य की साहित्यिक परंपरा को मजबूत करने वाला बताया.

-भारत एक्सप्रेस



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