India Fertility Rate Decline
India Fertility Rate Decline: भारत हजारों सालों से दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले इलाकों में शामिल रहा है. मौर्य काल हो, गुप्त काल हो या फिर मुगल काल भारत में हमेशा बड़ी आबादी रही है. आज भी भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है. यहां करीब 146 करोड़ लोग रहते हैं, लेकिन अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भारत के भविष्य पर चिंता की लकीरें खींच दी है. कहा जा रहा है कि भारत में बच्चे पैदा होने की रफ्तार लगातार कम हो रही है. यानी आने वाले सालों में भारत की आबादी बढ़ने के बजाय घट सकती है. संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNFPA की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का फर्टिलिटी रेट यानी एक महिला औसतन कितने बच्चों को जन्म देती है, वह घटकर 1.9 पर पहुंच गया है.
संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNFPA की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का फर्टिलिटी रेट यानी एक महिला कितने बच्चों को पैदा करती है उसकी औसत संख्या घटकर 1.9 हो गई है. आबादी को स्थिर रखने के लिए यह 2.1 होना चाहिये. यानी अब भारत की आबादी नीचे गिरेगी और आने वाले समय में बुजुर्गों की संख्या बढ़ जाएगी.
India’s birth rate has fallen below replacement.
Among those most educated, India’s birth rate fell below replacement many years ago. https://t.co/RsWf0PK6wx
— Elon Musk (@elonmusk) June 6, 2026
क्या यह खतरनाक है?
भारत की गिरती आबादी की वजह से सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या यह खतरनाक है? इसका सीधा जवाब है- अभी नहीं, लेकिन आगे चलकर हो सकता है. उदाहरण के लिए- मान लीजिए एक गांव में 100 लोग रहते हैं. उनमें से कुछ बुजुर्ग हैं, कुछ जवान हैं और कुछ बच्चे. अब अगर हर नई पीढ़ी में बच्चे कम पैदा होंगे, तो धीरे-धीरे गांव में बुजुर्ग ज्यादा और युवा कम होते जाएंगे. यानी काम करने वाले कम हो जाएंगे. इसीलिए एक्सपर्ट्स कहते हैं कि किसी भी देश के लिए 2.1 का फर्टिलिटी रेट आदर्श माना जाता है. इसे रिप्लेसमेंट लेवल कहते हैं. मतलब जितने लोग हैं, अगली पीढ़ी में उतने लोग बने रहें, लेकिन भारत अब 2.1 से नीचे, यानी 1.9 पर पहुंच चुका है. जबकि साल 1950 में भारत का फर्टिलिटी रेट 6.18 था. यानी उस समय एक महिला औसतन 6 बच्चों को जन्म देती थी. आज वही आंकड़ा 2 से भी नीचे आ गया है.

दिल्ली में तो मामला और दिलचस्प है. राजधानी का फर्टिलिटी रेट सिर्फ 1.2 है. यानी दिल्ली में लोग अब बहुत कम बच्चे पैदा कर रहे हैं. अब सवाल है कि ऐसा क्यों हो रहा है?
क्यों गिर रही जन्मदर?
भारत में जन्म दर गिरने की पहली वजह पढ़ाई और नौकरी बताई जा रही है. पहले लड़कियों की शादी कम उम्र में हो जाती थी. अब वे कॉलेज जा रही हैं, करियर बना रही हैं, नौकरी कर रही हैं. शादी की उम्र बढ़ रही है और बच्चे भी कम हो रहे हैं.
इसमें महंगाई भी एक बड़ा रोल प्ले कर रही है. आज एक बच्चे को भी पालना कोई आसान काम नहीं. स्कूल की फीस, मेडिकल खर्च, घर का किराया आज के समय इतने महंगे हो गए हैं कि लोग एक बच्चे से ज्यादा सोच भी नहीं पा रहे हैं. नई पीढ़ी के लिए जिंदगी का मतलब सिर्फ शादी और बच्चे नहीं रह गया है. लोग घूमना चाहते हैं, करियर बनाना चाहते हैं, आर्थिक रूप से मजबूत होना चाहते हैं. इसलिए परिवार छोटे होते जा रहे हैं.
समस्या तब होगी शुरू!
अब एक बड़ा सवाल. क्या कम आबादी होना बुरी बात है? तो इसका उत्तर है जरूरी नहीं है. कम आबादी का मतलब संसाधनों पर कम दबाव भी हो सकता है, लेकिन अगर जन्म दर लगातार बहुत नीचे चली जाए, तो समस्या शुरू होती है.
आप इसके उदाहरण के तौर पर जापान और दक्षिण कोरिया को देख सकते हैं. वहां बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है और युवा कम होते जा रहे हैं. जिसका नतीजा वहां के विकास दर पर पड़ रहा है. इन देशों में काम करने वाले लोग कम पड़ रहे हैं और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
ये भी पढ़ें- दिल्ली में सियासी हलचल: INDIA की बैठक vs TMC में फूट की आहट, भूपेंद्र यादव के घर 14 सांसद क्यों जमा हुए?
हालांकि भारत अभी दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है. लेकिन अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले दशकों में हमें भी ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

