AI द्वारा बनाई गई फोटो
विनोद मित्तल/फरीदाबाद: Faridabad Dog Crematorium News: इंसान के सबसे वफादार साथी यानी कुत्ते की मौत के बाद अब उसे बेकद्री का शिकार नहीं होना पड़ेगा. हरियाणा के फरीदाबाद (Faridabad) जिले में प्रशासन और समाजसेवियों ने मिलकर एक ऐतिहासिक पहल की है. फरीदाबाद के बूढ़ेना गांव (Budhena Village) में कुत्तों के लिए विशेष श्मशान घाट बनाया गया है. दावा किया जा रहा है कि यह भारत में अपनी तरह का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जो आवारा और पालतू दोनों तरह के कुत्तों को सम्मानजनक विदाई देगा.
गोबर के उपलों का इस्तेमाल इस प्रोजेक्ट को पूर्व आईएएस अधिकारी सुनील गुलाटी के सहयोग और नगर निगम (MCF) की मदद से सीएसआर (CSR) फंड के तहत तैयार किया गया है. यहां अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की जगह गोबर के उपलों का इस्तेमाल किया जाएगा, जो पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित है.
मोर्चरी वैन की सुविधा (Faridabad Budhena Village)
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब कुत्ते की मौत होने पर शव को यहां-वहां फेंकने की जरूरत नहीं होगी. नगर निगम ने मोर्चरी वैन (शव वाहन) की व्यवस्था की है. सूचना मिलते ही टीम घर या सड़क से शव को सम्मान के साथ श्मशान घाट तक लाएगी. नगर निगम के अधिकारी डॉ. नितेश परमार ने बताया कि फरीदाबाद में यह सुविधा शुरू होने से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी.
पुरानी समस्या से मिलेगा निजात
अब तक लोग मरे हुए कुत्तों को सड़क किनारे, खाली प्लॉट या कूड़े के ढेर में फेंक देते थे. इससे न केवल भयानक बदबू फैलती थी, बल्कि चील-कौवे शव को नोचते थे, जिससे रेबीज और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता था. अब खुले में शव फेंकने पर रोक लगेगी और शहर की स्वच्छता में सुधार होगा.
ये भी पढ़ें: घर का दरवाजा खोल सकता है किस्मत, जानें क्या कहता है वास्तु?
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, फरीदाबाद में करीब 50,000 कुत्ते (पालतू और आवारा) हैं. जिले में रोजाना औसतन 1 से 2 कुत्तों की मौत होती है. सोशल वर्कर विनीत खट्टर और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से अंतिम संस्कार होने से संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

