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समंदर में गूंजी भारत की दहाड़! जानें क्या है भारत का नया TARA सिस्टम जिसने उड़ाई चीन-पाक की नींद

भारतीय वैज्ञानिकों ने ‘TARA’ नामक पहली स्वदेशी ग्लाइड वेपन किट का सफल परीक्षण किया है. यह तकनीक साधारण बमों को स्मार्ट हथियारों में बदल देती है, जो हवा में ग्लाइड करते हुए सटीक निशाना साध सकते हैं.

India's First Indigenous Glide Bomb Kit 'TARA' Tested Successfully Technical Features Explained.

भारतीय रक्षा क्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है जो हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा कर देगी. आपने फिल्मों में देखा होगा कि कैसे एक मिसाइल अपने टारगेट को ढूंढते हुए उसका पीछा करती है और उसे तबाह कर देती है. अब भारत ने कुछ ऐसी ही जादुई तकनीक खुद तैयार कर ली है, जो हमारे पुराने और साधारण बमों को भी ‘स्मार्ट शिकारी’ बना देगी. डीआरडीओ (DRDO) और भारतीय वायुसेना ने ओडिशा के तट पर TARA (टैक्टिकल एडवांस रेंज ऑगमेंटेशन) ग्लाइड वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण कर पूरी दुनिया को भारत के बढ़ते रक्षा पराक्रम का लोहा मनवा दिया है.

क्या है TARA तकनीक?

आसान शब्दों में कहें तो TARA एक ऐसी ‘देसी किट’ है, जिसे अगर किसी सामान्य लोहे के बम पर फिट कर दिया जाए, तो वह बम एक हाई-टेक स्मार्ट हथियार की तरह काम करने लगता है. 7 मई को हुआ यह ट्रायल पूरी तरह सफल रहा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब हमें महंगे स्मार्ट बमों के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना होगा. हमारे पास मौजूद हजारों सामान्य बम अब इस स्वदेशी किट की मदद से दुश्मनों के काल बन सकेंगे.

हवा में ‘ग्लाइड’ कर दुश्मन के घर में घुसेगा बम

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी इसकी ‘ग्लाइड’ करने की क्षमता है. जब एक लड़ाकू विमान से इस किट लगे बम को छोड़ा जाता है, तो यह सीधे नीचे नहीं गिरता. इसके पंख खुल जाते हैं और यह हवा में तैरते हुए (Glide करते हुए) अपने टारगेट की ओर बढ़ता है.

क्या है ‘TARA’ की टेक्निकल खूबियां

सटीक निशाना: ये किट बम को नेविगेशन की ताकत देती है, जिससे वह सटीक पिन-पॉइंट लोकेशन पर हमला करता है.

पायलट की सुरक्षा: चूंकि यह बम दूर से ही छोड़ा जा सकता है और खुद ग्लाइड करते हुए लक्ष्य तक पहुंचता है, इसलिए भारतीय पायलटों को दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम या मिसाइलों के बहुत करीब जाने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा.

कम लागत, बड़ा धमाका: ये तकनीक बहुत ही कम खर्चे में तैयार की गई है, जिससे भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ‘मास्टरस्ट्रोक’

इसे हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं ने मिलकर बनाया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए एक मील का पत्थर बताया है. उन्होंने वैज्ञानिकों और वायुसेना की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह तकनीक आधुनिक युद्ध के मैदान में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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