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संघर्ष,पराक्रम और विजय की गाथा को याद कर संपन्न हुआ इस वर्ष का ‘गिरमिटिया महोत्सव’

भारतवंशी गिरमिटिया मजदूरों के वंशज आज दुनिया के कई देशों में प्रधानमंत्री, मंत्री और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर हैं. छठा गिरमिटिया महोत्सव 2025 में उनकी गौरव गाथा का उत्सव मनाया गया.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारतवंशी गिरमिटिया मजदूरो के वंशज आज दुनिया के कई देशों में प्रधानमंत्री, मंत्री, राष्ट्रपति और अन्य कई महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान हैं. अंग्रेजो से गुलामी के दौर में मॉरीशस, फिजी, गुयाना, त्रिनिनाद, दक्षिण अफ्रीका, जैसे देशों में एक गुलाम के रूप में गए भारत वंशी मजदूर आज इन देशों के मालिक बने हुए हैं. हमारी भारतीय संस्कृति की सनातन जीवनी शक्ति का परिणाम है गिरमिटिया समाज की गौरव गाथा. उक्त बातें भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद श्री सुधांशु त्रिवेदी ने छठवें गिरमिटिया महोत्सव 2025 के अवसर पर दिल्ली स्थित महाराजा अग्रसेन कॉलेज के सभागार में कही. उन्होंने भारत और इन देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को निरंतर बढ़ाने और मजबूत करने पर जोर दिया.

विरासत को बनाये रखने पर जोर

इस अवसर पर महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजीव तिवारी ने विभिन्न देशों से आए हुए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संघर्ष और पराक्रम की गाथा को नई पीढ़ी में पहुंचाने की जरूरत है. दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सुखलाल ने कहा कि साझी विरासत को बचाकर रखने की जरूरत है. मॉरीशस के पूर्व मंत्री एवं राजदूत श्री मुखेश्वर चुन्नी ने बताया कि हमारी सातवीं पीढ़ी अभी चल रही है हमारे पूर्वज बिहार के आरा जिले से थे. उन्होंने अपने पूर्वजों से सुनी गई दास्तान को सुनाकर सभी के मन मस्तिष्क को मर्माहत कर दिया.

बिहार विधान परिषद सदस्य एवं राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी श्री संजय मयूख ने अपनी बात भोजपुरी में रखते हुए कहा कि यह आयोजन सिर्फ एक महोत्सव नहीं है बल्कि करोड़ों हिन्दुस्तानियों की भावना है और भारत के प्रति गिरमिटिया लोगों के लगाव का अद्भुत उदाहरण है. भविष्य में यह आयोजन बिहार में कराने की बात भी कही,उन्होंने कहा, क्योंकि अधिकतर गिरमिटिया बिहार से थे और उनके वंशज आज भी खुद को बिहारी कहलाने में गौरव महसूस करते है.

गिरमिटिया फाउंडेशन का अनोखा कार्य

वहीं फाउंडेशन के संरक्षक एवं भाजपा प्रवक्ता डॉ धनंजय गिरि ने गिरमिटिया इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह इतिहास लेबर से मालिक बनने तक की सफल यात्रा का है. दुख से शुरुआत के साथ सुखद और सफल इतिहास का रहा है. गिरमिटिया और भारत के लोग एक है, उनका इतिहास, उनकी भावना, सभ्यता और संस्कृति एक है. भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष और मैथिली भोजपुरी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष अजीत दुबे ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि भारत की विभिन्न सरकारों ने आज तक भोजपुरी भाषा को उसका वाजिब हक अर्थात् संवैधानिक मान्यता नहीं दिया है जबकि भोजपुरी एक विश्व भाषा है जिसको मॉरीशस सरकार द्वारा बरसों पहले मान्यता दी जा चुकी है. गिरमिटिया फाउंडेशन की चेयरपर्सन स्वाति बोले गिरमिटिया फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डालते हुए भविष्य के योजनाओं की जानकारी दी.

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई महोत्सव की गरिमा

गुयाना उच्चायोग के प्रतिनिधि केशव तिवारी,सूरीनाम से अरुण हरदीन,दक्षिण अफ्रीका से पधारे प्रदीप रामलाल और हिंदी अकादमी दिल्ली के पूर्व उपाध्यक्ष विमलेश कांति वर्मा जी की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण रही. लोकगायिका कल्पना पटवारी, विजयलक्ष्मी उपाध्यक्ष,अंजली शिवाय की सांस्कृतिक प्रस्तुति, पूर्व उप महानिदेशक पर्यटन भारत सरकार संजय श्रीवत्स एवं पूर्व डायरेक्टर दूरदर्शन पटना डॉ रत्ना पुरकायस्थ एवं भारत एक्सप्रेस के संपादकीय सलाहकार विशाल तिवारी की उपस्थिति गरिमामयी रही. कवि विनय विनम्र, देवकांत पांडे,डॉ देवेंद्रनाथ तिवारी,डॉ राजेश कुमार मांझी, मुन्ना पाठक इत्यादि ने कविताओं से सभागार को प्रभावित किया.

हॉल में बैठे युवा जोश से महोत्सव की सार्थकता बढ़ गई. अंत में गिरमिटिया फाउंडेशन के अध्यक्ष दिलीप गिरि ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया. उन्होंने बताया कैसे गिरमिटिया फाउंडेशन दुनिया भर में फैले भारतवंशी गिरमिटिया परिवारों को उनके पूर्वजों के गांव से जोड़ने पर अनोखा कार्य कर रहे है. दिलीप गिरि ने बताया अबतक लगभग दो सौ परिवारों को भारत में उनके गिरमिटिया पूर्वजों के गांवों को पता लगाने में सहायता किया है. यह आयोजन उन गिरमिटिया पूर्वजों को सच्ची श्रद्धांजलि है. समारोह में दर्जनों देशों के प्रतिनिधि, अनेकों प्रोफेसर,स्कॉलर, विद्वान,शोधार्थी,छात्र,राजनीतिज्ञ आदि की उपस्थिति ने गिरमिटिया महोत्सव को पूर्णतः सफल बना दिया.

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-भारत एक्सप्रेस



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