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भारत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के हब के रूप में उभरने के लिए तैयार : पीएम मोदी

केंद्रीय मंत्री वैष्णव के आर्टिकल में सेमीकंडक्टर को स्टील, बिजली, दूरसंचार, रसायन और परिवहन जैसे आधारभूत क्षेत्रों का हिस्सा माना गया है.

Semiconductor

पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से बुधवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के एक आर्टिकल पर प्रकाश डाला गया, जिसमें कहा गया है कि आने वाले दशक में जैसे-जैसे भारत की सेमीकंडक्टर (Semiconductor) यूनिट्स बड़े पैमाने पर परिपक्व होती जाएंगी वैसे-वैसे देश संपूर्ण सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के लिए एक प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार होने लगेगा.

Semiconductor यात्रा पर लिखा आर्टिकल

पीएमओ की ओर से कहा गया, “केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की परिवर्तनकारी सेमीकंडक्टर यात्रा पर आर्टिकल लिखा है, जिसमें बताया गया है कि ‘सेमीकॉन इंडिया समिट 2025’ इसी मार्ग की निरंतरता का प्रतीक है.”

केंद्रीय मंत्री वैष्णव के आर्टिकल में सेमीकंडक्टर को स्टील, बिजली, दूरसंचार, रसायन और परिवहन जैसे आधारभूत क्षेत्रों का हिस्सा माना गया है. वे लगभग हर उस चीज के अंदर छिपे हुए इंजन हैं, जिसका हम उपयोग करते हैं.

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा है कि भविष्य में सेमीकंडक्टर का चलन बढ़ता ही जाएगा. इलेक्ट्रॉनिक्स की हमारी अपनी खपत और उत्पादन अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है. भारत में आज 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन यूजर्स हैं और हमारा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सालाना 12 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच रहा है.

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चिप बेस्ड ईवी विकसित किया जा रहा

देश एआई-बेस्ड सिस्टम, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर चिप्स की जरूरत वाले इलेक्ट्रिक वाहन भी विकसित कर रहा है. मांग और इनोवेशन, दोनों में यह वृद्धि भारत के लिए ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी जगह सुरक्षित करना जरूरी बनाती है.

आर्टिकल में कहा गया है, “दशकों से, भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में ‘छूट’ गया बताया जाता रहा है. अब यह बात सच नहीं रही. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत, 10 सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दी गई है. इन प्लांट का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. आज, हम पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि पहली ‘मेड इन इंडिया’ चिप इसी वर्ष मार्केट में आ जाएगी. साणंद में एक इकाई में पायलट उत्पादन लाइन पहले ही शुरू हो चुकी है और एक वर्ष के भीतर, हमें उम्मीद है कि चार और यूनिट उत्पादन में लग जाएंगी. एप्लाइड मैटेरियल्स, लैम रिसर्च, मर्क और लिंडे जैसे वैश्विक दिग्गज कारखानों और सप्लाई चेन को समर्थन देने में निवेश कर रहे हैं. यह इकोसिस्टम दृष्टिकोण भारत में उद्योग के दीर्घकालिक विकास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्यान को दर्शाता है.”

पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएमओ ने आगे कहा, “हमारे प्रधानमंत्री का स्पष्ट दृष्टिकोण, कार्यान्वयन पर ध्यान, पेशेवरों के हाथों में निर्णय लेने की प्रक्रिया, वैश्विक सहयोग और राज्य सरकारों का मजबूत समर्थन जैसे कई कारकों के संयोजन से इतने कम समय में यह बड़ी सफलता मिली है. भारत की असली ताकत यानी उसके लोगों का दोहन करने के लिए नीतियां और निवेश महत्वपूर्ण हैं. वर्तमान में भारत में ग्लोबल डिजाइन वर्कफोर्स का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है.”

Semiconductor पेशेवरों की कमी हो सकती है

एक उद्योग अनुमान के अनुसार, अगले दशक की शुरुआत तक दुनिया में दस लाख से अधिक सेमीकंडक्टर (Semiconductor) पेशेवरों की कमी होने की आशंका है. भारत इस कमी को पूरा करने की तैयारी कर रहा है. 350 संस्थानों और स्टार्टअप्स के 60,000 से अधिक यूजर्स भारत सरकार द्वारा निःशुल्क प्रदान किए गए विश्वस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.

स्टार्टअप्स मजबूत सरकारी समर्थन से भारत के चिप डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत बना रहे हैं. माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज, आईआईटी मद्रास द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित शक्ति प्रोसेसर पर आधारित आईओटी चिप्स विकसित कर रही है.

एक अन्य स्टार्टअप, नेत्रसेमी ने हाल ही में रिकॉर्ड 107 करोड़ रुपए की फंडिंग प्राप्त की है. यह भारत के सेमीकंडक्टर (Semiconductor) डिजाइन क्षेत्र में सबसे बड़े वेंचर कैपिटल निवेशों में से एक है, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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