भारतीय सेना ने तकनीकी रूप से एक बड़ा कदम उठाते हुए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) आधारित स्वदेशी अनुप्रयोगों का विकास किया है, जो आने वाले समय में सेना की साइबर सुरक्षा और संचार प्रणाली को अत्याधुनिक बनाएंगे.
यह तकनीकी विकास मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE), महू द्वारा कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स के तत्वावधान में किया गया है. यह सेना प्रमुख (COAS) के तकनीकी अनुसंधान विजन के अनुरूप एक दूरदर्शी पहल मानी जा रही है.
पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी एक ऐसी अगली पीढ़ी की सुरक्षा प्रणाली है जो पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटिंग हमलों से बचाव करने में सक्षम है. भारतीय सेना अब इन PQC समाधानों को अपनी नेटवर्क प्रणालियों में चरणबद्ध रूप से एकीकृत कर रही है. इसका उद्देश्य है — सेना की संचार प्रणाली को भविष्य के खतरों के प्रति सुरक्षित बनाना और हर डोमेन में उसकी तकनीकी क्षमता को बढ़ाना.
यह पहल यह दर्शाती है कि भारतीय सेना सिर्फ आज की नहीं, बल्कि भविष्य की युद्ध चुनौतियों का सामना करने के लिए भी पूरी तरह तैयार हो रही है. तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में यह कदम न केवल सेना की आत्मनिर्भरता को मजबूती देता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में भी निर्णायक साबित होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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