संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा प्रमुख जीन-पियरे लैक्रोइक्स ने कहा है कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है और भारतीय महिला शांति रक्षक यह साबित कर रही हैं कि जिन मिशनों में महिलाओं की अधिक भागीदारी होती है, वे अधिक प्रभावी होते हैं और स्थायी शांति में योगदान देते हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल फॉर पीस ऑपरेशंस लैक्रोइक्स इस सप्ताह नई दिल्ली का दौरा करेंगे. वह भारत द्वारा 24-25 फरवरी को आयोजित होने वाले सम्मेलन ‘शांति स्थापना में महिलाओं की भूमिका को बढ़ावा देना: ग्लोबल साउथ का अनुभव’ में भाग लेंगे.
महिला शांति रक्षकों की बढ़ती भूमिका और प्रभाव
लैक्रोइक्स ने पीटीआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, “भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है और भारतीय महिला शांति रक्षक शांति स्थापना की परिभाषा को ही बदल रही हैं.”
उन्होंने इस सम्मेलन को एक “विशेष अवसर” बताते हुए कहा कि इसमें ग्लोबल साउथ के लगभग 50 देशों की महिला अधिकारी भाग लेंगी. इस दौरान शांति स्थापना से जुड़ी बदलती चुनौतियों और शांति व सुरक्षा को बढ़ावा देने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा होगी.
लैक्रोइक्स ने कहा, “शांति अभियानों में महिलाओं की अधिक भागीदारी से वे अधिक प्रभावी बनते हैं. भारत ने लंबे समय से शांति स्थापना में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाई है—न केवल शीर्ष सैन्य और पुलिस बलों के योगदानकर्ता के रूप में, बल्कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में नेतृत्व करने और मिशनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी भारत प्रतिबद्ध है.”
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय महिला शांति रक्षकों की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि “जिन मिशनों में महिलाओं की अधिक भागीदारी होती है, वे स्थानीय समुदायों के साथ मजबूत संबंध बनाते हैं, बेहतर संचालनात्मक परिणाम प्राप्त करते हैं और स्थायी शांति में योगदान देते हैं.”
-भारत एक्सप्रेस
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