Indore Water Crisis in Rajya Sabha: जय व्यास/इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई 32 मौतों का मामला सोमवार को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में गूंजा. कांग्रेस सांसदों ने जब मौतों और जवाबदेही पर सवाल उठाए तो केंद्र सरकार ने पुरानी पाइपलाइनों को इसका जिम्मेदार बताया. वहीं, बहस के दौरान जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के एक बयान ने सबको चौंका दिया जब उन्होंने इंदौर को ‘सबसे स्वच्छ शहर’ मानने से ही इनकार कर दिया.
1997 की पाइपलाइन को बताया दोषी
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री टोखन साहू ने लिखित जवाब में बताया कि भागीरथपुरा में 1997 की पुरानी पाइपलाइनें बिछी हैं, जो कई जगह से क्षतिग्रस्त हैं. सरकार ने बताया कि अमृत-2.0 (Amrut 2.0) योजना के तहत इंदौर की जलापूर्ति सुधारने के लिए 4 पैकेज तैयार किए गए हैं.
मध्य प्रदेश सरकार का रुख
मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने बताया कि अब तक 14,181 लीकेज ढूंढे गए हैं, जिनमें से 12,634 की मरम्मत की जा चुकी है. इसके अलावा 588 जगहों पर पानी प्रदूषित मिलने पर कार्रवाई की गई है. अमृत 2.0 के तहत इंदौर के लिए 1,142 करोड़ रुपये की दो जलापूर्ति योजनाएं मंजूर की गई हैं.
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‘सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार जल विभाग में’
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सवाल दागा कि 32 दिनों में 32 मौतें हो चुकी हैं, आखिर जिम्मेदारी किसकी है? वहीं, राजस्थान से सांसद प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार जल संसाधन विभाग में है. बहस के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब इमरान प्रतापगढ़ी ने इंदौर को ‘देश का सबसे स्वच्छ शहर’ कहा.
इस पर जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने टोकते हुए कहा कि मंत्रालय की ओर से जो कॉम्पिटिशन होता है, उसमें देश का सबसे स्वच्छ शहर सूरत (Surat) है. इंदौर को सबसे स्वच्छ बताना आपकी गलतफहमी है. पाटिल ने यह भी कहा कि पानी राज्य का विषय है, इसलिए जिम्मेदारी राज्य सरकार की है.
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