Karnataka Kesari- Jagannathrao Joshi
Jagannathrao Joshi Birth Anniversary: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता जगन्नाथराव जोशी को राष्ट्रहित के लिए समर्पित एक साहसी और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में स्मरण करते हैं. उनकी जयंती के अवसर पर अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जगन्नाथराव जोशी साहस, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा की मिसाल थे. उनका जीवन देश के प्रति समर्पण, संघर्ष और संगठन निर्माण की अद्भुत प्रेरणा देता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा.
RSS में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई- अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पोस्ट कर लिखा, “कर्नाटक के केसरी जगन्नाथराव जोशी जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि. देशभक्ति और साहस की मिसाल, जोशी जी ने तमाम कठिनाइयों और दमन का सामना करते हुए गोवा की मुक्ति के लिए अग्रिम मोर्चे पर संघर्ष किया.”
अमित शाह ने आगे लिखा, “उन्होंने (जगन्नाथराव जोशी) अपना जीवन राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित कर दिया और कर्नाटक में आरएसएस और भाजपा के राष्ट्रवादी आदर्शों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी विरासत हर राष्ट्रवादी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी.”
Tributes to Karnataka Kesari Jagannathrao Joshi Ji on his Jayanti. An epitome of patriotism and courage, Joshi Ji fought for the liberation of Goa from the frontlines despite facing tremendous hardship and repression. He dedicated his life to the cause of national unity and… pic.twitter.com/I4YtFTYIRo
— Amit Shah (@AmitShah) June 23, 2026
कौन थे ‘कर्नाटक केसरी’ जगन्नाथराव जोशी?
23 जून 1920 को कर्नाटक के नरगुंड में जन्मे जगन्नाथराव जोशी ने पुणे के नूतन मराठी विद्यालय से स्कूली शिक्षा और सर परशुरामभाऊ कॉलेज से अंग्रेजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. छात्र जीवन में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और बाद में पूर्णकालिक प्रचारक बने. उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण और जनजागरण के कार्यों को समर्पित किया.
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‘कर्नाटक केसरी’ के नाम से विख्यात जगन्नाथराव जोशी भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अपनी प्रभावशाली वाणी, दृढ़ नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक कौशल के कारण उन्होंने देश की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई. वे न केवल एक प्रखर राष्ट्रवादी विचारक थे, बल्कि जनसंघ के विस्तार और दक्षिण भारत में संगठन को मजबूत करने वाले प्रमुख नेताओं में भी गिने जाते हैं. गोवा मुक्ति संग्राम में उनके योगदान को आज भी विशेष सम्मान के साथ याद किया जाता है.
-भारत एक्सप्रेस
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