Jharkhand Student JPSC Protest: रांची/मधुकर आनंद: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन अब एक बेहद विस्फोटक मोड़ पर पहुंच चुका है. आज आंदोलन का 20वां दिन है और पिछले 10 दिनों से रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में चार छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं. प्रचंड गर्मी के बावजूद समाजसेवियों द्वारा दिए जा रहे सत्तू और खीरे के सहारे ये छात्र आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं. दो छात्रों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल भेजा गया, लेकिन बाकी दो ने हार नहीं मानी है. इसी बीच, छात्रों ने 16 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेरने का बड़ा ऐलान कर दिया है, जिससे पूरी राजधानी को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है.
किले में तब्दील CM आवास (JPSC Protest CM House Gherao)
भूख हड़ताल पर बैठी एक छात्रा ने सीधे तौर पर राज्य सरकार और ‘कल्पना भौजी’ (कल्पना सोरेन) पर अपनी भड़ास निकाली. दिलचस्प बात यह है कि धरनास्थल पर बापू (महात्मा गांधी) और बाबा साहेब के साथ ‘गुरुजी’ (शिबू सोरेन) की तस्वीर भी लगी है, जिससे छात्र ताकत ले रहे हैं. 16 अगस्त को सीएम आवास (CM House) घेराव के इनपुट मिलते ही प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं. मुख्यमंत्री आवास के आसपास के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और पूरा इलाका किसी ‘अभेद्य किले’ में तब्दील हो गया है.
राहुल गांधी का ‘दोहरा रवैया’ (Congress Double Standard On JPSC)
इस पूरे आंदोलन ने झारखंड की गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक मुसीबत खड़ी कर दी है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक मामले में प्रधानमंत्री आवास तक धरना देने वाले राहुल गांधी का ‘छात्र-हितैषी’ चेहरा झारखंड में बुरी तरह घिर गया है. दिल्ली में कांग्रेस तत्कालीन शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र प्रधान) का इस्तीफा मांग रही थी, लेकिन जब रांची में अपनी ही गठबंधन सरकार की पुलिस छात्रों पर लाठियां बरसा रही है, तो दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.
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अपनी सरकार के खिलाफ बोलने से बच रहे राहुल (JPSC Protest Latest Update)
कांग्रेस इस वक्त अजीब धर्मसंकट में है. वह अपनी सरकार का बचाव करने के बजाय प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी होने का दावा कर रही है. राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन में व्यवस्था को दमनकारी बताया और कहा कि “चाहे कांग्रेस सरकार हो, केंद्र हो या झारखंड सरकार, सबको छात्रों की सुननी चाहिए.” लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ बयानबाजी काफी है? अगर राहुल सच में छात्रों के साथ हैं, तो वे अपनी ही सरकार (हेमंत सोरेन सरकार) से सीधे तौर पर कार्रवाई क्यों नहीं करवा रहे हैं? छात्रों का 16 अगस्त का यह घेराव कांग्रेस और JMM सरकार दोनों के लिए एक बड़ी सियासी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है.
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