CJP protest vs JPSC protest: आंदोलन शब्द सुनते ही अक्सर दिमाग में क्या तस्वीर आती है? नारेबाजी, भीड़, धक्का-मुक्की, पुलिस से टकराव और कभी-कभी हिंसा. लेकिन झारखंड की राजधानी रांची से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने इस सोच को पूरी तरह बदलने की कोशिश की है. यहां हजारों छात्र अपने भविष्य, रोजगार और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सड़कों पर हैं. लेकिन इस आंदोलन की सबसे बड़ी पहचान उनकी भीड़ नहीं, बल्कि उनका अनोखा अनुशासन बन गया है.
प्रदर्शन स्थल पर छात्रों ने अपनी मांगों के साथ एक पोस्टर लगाया है. इस पोस्टर में उनके Code of Conduct लिखें गए हैं. इसमें उनके प्रदर्शन की गाइडलाइन साफ दर्ज हैं. ऐसे में इसे लेकर अब CJP के प्रदर्शन को सीख दी जा रही है.
क्या है रांची का ‘कोड ऑफ कंडक्ट’? (Why are JPSC Protest Poster Viral)
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र पिछले 14 दिनों से JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं. अभ्यर्थियों की मुख्य मांग 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना है. इसी आंदोलन स्थल पर छात्रों ने हाथ से लिखा हुआ एक पोस्टर लगाया है, जिस पर ‘CODE OF CONDUCT’ लिखा है. इसके तहत चार मुख्य नियम तय किए गए हैं.
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- पहला नियम: मंच का इस्तेमाल केवल आंदोलन और छात्रों के मुद्दों के लिए होगा. यहाँ किसी भी तरह की राजनीतिक, जातीय या राष्ट्र-विरोधी टिप्पणी नहीं की जाएगी.
- दूसरा नियम: आंदोलन के दौरान सिर्फ JPSC और JSSC से जुड़े मुद्दों पर ही बात होगी.
- तीसरा नियम: किसी भी व्यक्ति पर व्यक्तिगत आरोप लगाने या अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने से बचा जाएगा.
- चौथा नियम: पूरा आंदोलन संविधान और कानून की मर्यादा में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा.
सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा है वायरल? (JSSC recruitment controversy Update)
छात्रों का यह पोस्टर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. यूज़र्स का कहना है कि यह पोस्टर शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन की एक मिसाल है. लोगों ने लिखा कि आंदोलन सिर्फ नारेबाजी या हंगामे का नाम नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों की लड़ाई मर्यादा और संविधान के दायरे में रहकर भी लड़ी जा सकती है.
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CJP के प्रदर्शन से हो रही तुलना (JPSC Protest Code of Conduct)
आज जब अक्सर आंदोलन हिंसा, टकराव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की वजह से सुर्खियां बनते हैं, ऐसे समय में रांची के छात्रों ने CJP जैसे उग्र प्रदर्शनकारियों को एक बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए शोर और उपद्रव नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन और स्पष्ट उद्देश्य भी काफी होते हैं.
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