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निठारी केस से AMU तक… कौन हैं पंजाब-हरियाणा HC के चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा?

Punjab-Haryana High Court CJI: जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली. जानिए उनकी शिक्षा, करियर और चर्चित फैसलों के बारे में.

CJI Ashwini Kumar Mishra

कौन हैं पंजाब-हरियाणा HC के चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा

Punjab-Haryana High Court CJI: जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने सोमवार, 7 सितंबर 2026 को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Punjab Haryana High Court CJI) के तौर पर शपथ ले ली. उनका शपथ ग्रहण ऐसे समय हुआ है, जब उनकी नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार ने आपत्ति जताई थी. समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए.

चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी संभालने वाले जस्टिस मिश्रा का न्यायिक करियर करीब तीन दशक लंबा रहा है. उन्होंने वकालत से लेकर हाई कोर्ट के जज और फिर मुख्य न्यायाधीश तक का सफर तय किया है.

दिल्ली से पढ़ाई, 1993 में शुरू की वकालत

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था (Who is Justice Ashwini Kumar Mishra). उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से बीए ऑनर्स (इकोनॉमिक्स) किया. इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की.

8 मई 1993 को उन्होंने वकील के तौर पर अपना नामांकन कराया. शुरुआती दौर में उन्होंने सिविल, संवैधानिक और सर्विस से जुड़े मामलों की पैरवी की. वह नोएडा और गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी समेत कई सरकारी और वैधानिक संस्थाओं के लिए भी बतौर आर्ग्युइंग काउंसिल काम कर चुके हैं. इनमें इलाहाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी, IFFCO, IOC और यूपी पावर कॉर्पोरेशन जैसे नाम शामिल हैं.

2014 में बने एडिशनल जज

जस्टिस मिश्रा को साल 2013 में सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला. इसके कुछ ही समय बाद 3 फरवरी 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया. करीब दो साल बाद, 1 फरवरी 2016 को उन्होंने स्थायी जज के रूप में शपथ ली.

21 जुलाई 2025 को उनका ट्रांसफर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में किया गया. इसके बाद उन्होंने यहां एक्टिंग चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी भी संभाली और अब उन्हें स्थायी मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है.

इन फैसलों से भी चर्चा में रहे

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा कई अहम मामलों में फैसले दे चुके हैं. निठारी हत्याकांड (2005-06) में उन्होंने सीबीआई जांच में कमियों और पर्याप्त ठोस सबूत नहीं होने के आधार पर सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी किया था.


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इसके अलावा पंजाब सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते से जुड़े मामले में उन्होंने सरकार को कर्मचारियों के बकाये का भुगतान करने और विज्ञापनों व मुफ्त योजनाओं पर खर्च को लेकर सवाल उठाए.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून की नियुक्ति को भी उन्होंने वैध ठहराया था. वहीं, ग्रेच्युटी और परीक्षा फीस से जुड़े मामलों में दिए उनके फैसलों में कर्मचारियों और छात्रों के अधिकारों पर जोर दिखाई दिया.

-भारत एक्सप्रेस



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