सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत (Justice Suryakant) ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी की. उन्होंने (Justice Suryakant) कहा कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं.
वकील की याचिका पर सुनवाई
यह टिप्पणी उस समय आई जब सीजेआई सूर्यकांत (Justice Suryakant) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच एक वकील की याचिका सुन रही थी. याचिकाकर्ता ने खुद को सीनियर एडवोकेट का दर्जा देने की मांग की थी. कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समाज में पहले से ही परजीवी मौजूद हैं, जो सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं.
सीनियर एडवोकेट बनने पर सवाल
बेंच ने कहा कि हर कोई सीनियर बनने का हकदार नहीं होता. अगर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी आपको सीनियर एडवोकेट बना दिया तो सुप्रीम कोर्ट आपके व्यवहार को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देगा. कोर्ट ने पूछा कि क्या आपके पास कोई और केस नहीं है और क्या यह किसी सीनियर एडवोकेट बनने की चाह रखने वाले का सही रवैया है.
डिग्री की जांच की बात
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह सीबीआई से कई वकीलों की डिग्री की जांच कराने पर विचार कर सकता है, क्योंकि उनकी डिग्री की वैधता पर गंभीर सवाल हैं. कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस पर कार्रवाई नहीं करेगा, क्योंकि उन्हें वोट चाहिए.
याचिका वापस ली गई
सुनवाई के अंत में याचिकाकर्ता ने कोर्ट से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी.
शुरुआती जीवन और शिक्षा
जस्टिस सूर्यकांत (Justice Suryakant) का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में हुआ. उन्होंने 1981 में हिसार से ग्रेजुएशन पूरी की. इसके बाद 1984 में रोहतक से एलएलबी की पढ़ाई की और 2011 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एलएलएम की डिग्री हासिल की.
करियर की शुरुआत
उनका (Justice Suryakant) कानूनी करियर 1984 में हिसार की जिला अदालत से शुरू हुआ. इसके बाद 1985 में उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ में प्रैक्टिस शुरू की. उनकी विशेषज्ञता संवैधानिक सेवा और सिविल मामलों में रही.
अहम पद और उपलब्धियां
- 2000 में वे हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने.
- 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला.
- 2004 में वे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने.
- 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया.
- 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के जज बने.
- 2024 में वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन बने.

अन्य भूमिकाएं
जस्टिस सूर्यकांत (Justice Suryakant) 2007 से 2011 तक नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य रहे. इसके अलावा वे इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट की कई समितियों में भी शामिल रहे.
कब होंगे रिटायर?
उनका (Justice Suryakant) कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को समाप्त होगा.
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