Urdu Conclave 2026

इश्क करना है तो उर्दू सीखिए! ‘बज़्म-ए-सहाफ़त’ में किरेन रिजिजू ने कहा यह हिंदुस्तानी जुबान

दिल्ली के IIC में भारत एक्सप्रेस उर्दू के कॉन्क्लेव ‘बज़्म-ए-सहाफ़त’ में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पहुंचे. यहां उन्होंने कहा कि उर्दू इसी मिट्टी में जन्मी हिंदुस्तानी जबान है. इसके साथ ही उन्होंने इश्क और युवाओं को लेकर बड़ी बात कही है.

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दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित ‘भारत एक्सप्रेस उर्दू’ के तीसरे राष्ट्रीय कॉन्क्लेव ‘बज़्म-ए-सहाफ़त’ में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की. कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उर्दू किसी खास धर्म या तबके की जुबान नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की अपनी मिट्टी से उपजी वह भाषा है जो भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का सबसे बड़ा प्रतीक है. युवाओं को भाषाई खूबसूरती से जोड़ने की वकालत करते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि आजकल के युवाओं को अगर सच्चा इश्क करना है, तो उन्हें उर्दू जरूर सीखनी चाहिए.

हिंदुस्तानी जुबान है उर्दू- Kiren Rijiju

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन भ्रांतियों को सिरे से खारिज किया जो उर्दू को सीमा-पार से जोड़ती हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग गलती से उर्दू को पाकिस्तान की जबान मान बैठते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि विभाजन के बाद केवल लोग वहां गए; भाषा का जन्म तो भारत की ही सरजमीं पर हुआ है. यह विशुद्ध रूप से हिंदुस्तानी जबान है.

रिजिजू ने कहा कि उर्दू एक बेहद ‘रिच लैंग्वेज’ है, लेकिन यह सिर्फ संपन्न या खास लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. यह आम इंसान की जुबान बननी चाहिए. यह गलत धारणा बन गई थी कि उर्दू केवल दरबारों, शायरों या बहुत पढ़े-लिखे तबके की है, जबकि यह दिल से बात करने का सबसे सहज जरिया है. उर्दू बोलने वालों का अंदाज बेहद अनुशासित, शालीन और संजीदा होता है. इस जबान में कुछ ऐसा सम्मोहन है जो इंसान को खास बना देता है.

‘उर्दू न होती तो न बनते वो सदाबहार नगमे’

भारतीय सिनेमा और संगीत में उर्दू की भूमिका को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे नए गानों के बजाय पुराने नगमे सुनना पसंद करते हैं क्योंकि पुराने गानों में उर्दू के उम्दा अल्फाज का सही इस्तेमाल होता था. साहिर लुधियानवी और नौशाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उर्दू जबान नहीं होती, तो भारतीय सिनेमा के गीत कभी इतने खूबसूरत और अमर नहीं हो सकते थे.

युवाओं को उर्दू से जोड़ना जरूरी

आज की युवा पीढ़ी के डिजिटल रुझान पर बोलते हुए रिजिजू ने कहा कि युवा आजकल इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया की दुनिया में व्यस्त रहते हैं. यदि हमें इस भाषा का विस्तार करना है, तो नई पीढ़ी को इसकी खूबसूरती और मिठास समझानी होगी. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर इश्क करना है, तो उर्दू सीखना जरूरी है; उर्दू से जुड़ते ही मोहब्बत अपने आप पक्की हो जाएगी. उर्दू आज एक अंतरराष्ट्रीय भाषा बन चुकी है और खाड़ी देशों व सऊदी अरब में भी इसके अनेक अल्फाज अरबी के साथ घुले-मिले हैं.

पीएम मोदी के जन्मदिन पर मांगी दीर्घायु की दुआ

संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का उल्लेख करते हुए मंच से उनके लिए दुआ मांगी. उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के साथ मिलकर वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए ईश्वर प्रधानमंत्री को लंबी उम्र और भरपूर शक्ति प्रदान करे. इसके साथ ही उन्होंने उर्दू के विकास के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया.



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