Women reservation bill: संसद के विशेष सत्र से पहले महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार पूरी तरह तैयार दिख रही है. सरकार ने लोकसभा में नियम 66 को निलंबित करने का प्रस्ताव लाने का फैसला किया है ताकि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को एक साथ पास कराया जा सके.
तीन अहम बिल होंगे पेश
गुरुवार को सरकार तीन बड़े बिल पेश करेगी. इनमें संविधान संशोधन 131 के तहत सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव, डेलिमिटेशन बिल 2026 और यूनियन टेरिटरी लॉज (संशोधन) 2026 शामिल हैं. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पहले दो बिल पेश करेंगे, जबकि गृहमंत्री तीसरा बिल पेश करेंगे.
महिला आरक्षण बिल सूचीबद्ध
लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने वाला विधेयक भी गुरुवार को चर्चा के लिए रखा गया है. इसमें 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है. कार्य मंत्रणा समिति ने इस पर 18 घंटे की बहस का समय तय किया है, जो शुक्रवार तक भी चल सकती है.
विपक्षी दलों की रणनीति
बिल पेश होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर विपक्षी दलों की बैठक हुई. इसमें परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का विरोध करने का निर्णय लिया गया. विपक्ष चाहता है कि महिला आरक्षण मौजूदा 543 सीटों के आधार पर लागू हो.
कांग्रेस की चिंता
कांग्रेस नेता अनंत गाडगिल ने कहा कि इस विधेयक से उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच भावनात्मक विभाजन हो सकता है. उन्होंने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनगणना रिपोर्ट 2027 तक आएगी, ऐसे में पुराने आंकड़ों पर आधारित फैसला उचित नहीं है.
राहुल गांधी का आरोप
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर ओबीसी का हिस्सा छीना जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार 2011 की जनगणना का इस्तेमाल करना चाहती है, जिसमें ओबीसी की संख्या दर्ज नहीं है. राहुल ने इसे राष्ट्र विरोधी गतिविधि करार दिया.
अखिलेश यादव का क्या कहना है?
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक दरअसल पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग (पीडीए) का हक मारने की साजिश है. उन्होंने बीजेपी पर जनगणना टालने की नीयत रखने का आरोप लगाया.
महिला नेताओं का समर्थन
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और बसपा प्रमुख मायावती ने इस पहल का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा और लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत होगा. पाटिल ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में इसे ऐतिहासिक कदम बताया.
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लंबे संघर्ष का सुखद अंत
मीरा कुमार और मायावती ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कार्यान्वयन लंबे इंतजार के बाद एक बड़ी उपलब्धि होगी. उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र में महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम बताया.
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-भारत एक्सप्रेस
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