Andhra Pradesh Cockfight: तेलुगु भाषी राज्यों में मकर संक्रांति का त्योहार खास अंदाज में मनाया जाता है. तेलंगाना में जहां पतंगबाजी और मजेदार प्रतियोगिताएं होती हैं, वहीं आंध्र प्रदेश में यह त्योहार मुर्गों की लड़ाई के लिए जाना जाता है. संक्रांति में अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं और गोदावरी जिले में तैयारियां जोरों पर हैं.
सट्टेबाजों की बड़ी तैयारी
आंध्र प्रदेश के गोदावरी जिले में होने वाली मुर्गों की लड़ाई देखने के लिए न सिर्फ राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बल्कि तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक से भी लोग पहुंचते हैं. यहां सिर्फ लड़ाई ही नहीं होती, बल्कि करोड़ों रुपये का दांव भी लगाया जाता है. इस बार भी उम्मीद है कि मुकाबलों पर भारी रकम सट्टे के तौर पर लगेगी.
प्रतियोगिता के लिए खास ट्रेनिंग
लड़ाई से पहले मुर्गों को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. दांव कैसे लगाया जाए, कौन से गिरोह सक्रिय होंगे और वीआईपी मेहमानों के लिए क्या इंतजाम होंगे—इन सब पर प्लानिंग चल रही है. आयोजक सट्टेबाजों को आकर्षित करने के लिए नए-नए प्रयोग और पुरस्कार भी रख रहे हैं.
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मुर्गों को मिल रहा खास खानपान
मुर्गों को ताकतवर बनाने के लिए उन्हें बादाम, काजू, अंडे, जंगली जानवरों का मांस और हरी सब्जियां खिलाई जा रही हैं. सुबह-शाम उन्हें व्यायाम कराया जाता है और बीमारियों से बचाने के लिए पानी के टैंक में तैराया भी जाता है. अच्छी नस्ल के चूजों की मांग इतनी बढ़ गई है कि बाजार में उनकी कीमत 50 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक पहुंच गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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