रिपोर्ट- मुकेश बैरागी
मध्यप्रदेश के मंडला जिले में इन दिनों नाम को लेकर छिड़ी सियासी जंग ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है. मामला इतना गरमा गया है कि शहर की सड़कों पर हजारों की भीड़ उतर आई है. दरअसल, सारा विवाद मोहन सरकार की कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने मंडला का नाम बदलकर ‘महिष्मति’ करने की बात कही थी. इस बयान ने आदिवासी समाज और स्थानीय राजनीति में एक चिंगारी सुलगा दी, जो अब मशाल बनकर सड़कों पर दिख रही है.
सड़कों पर उतरा जनसैलाब
मंगलवार को मंडला जिला मुख्यालय का नजारा बदला-बदला था. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) के आह्वान पर हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग जुटे. यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि अपनी पहचान और इतिहास को बचाने की एक भावुक अपील भी थी. निषाद राज भवन के सामने एक विशाल जनसभा हुई, जिसके बाद जनसैलाब रैली की शक्ल में बैगा-बैगी चौक की ओर बढ़ा. प्रदर्शनकारियों के हाथों में झंडे थे और जुबां पर अपनी संस्कृति की रक्षा के नारे.
पुतला दहन और कड़ा विरोध
गुस्सा इतना ज्यादा था कि कोतवाली के सामने प्रदर्शनकारियों ने मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल और यहां तक कि कलेक्टर सोमेश मिश्रा का पुतला भी फूंका. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि मंडला का इतिहास गोंड राजाओं के शौर्य से जुड़ा है और इसे मिटाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
सभा को संबोधित करते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर मरकाम ने दो टूक शब्दों में कहा, “मंडला हमारी ऐतिहासिक राजधानी रही है. हम अपने पुरखों की विरासत और इस मिट्टी की पहचान को किसी भी कीमत पर बदलने नहीं देंगे. मंडला का नाम ‘मंडला’ ही रहेगा.” पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने भी सरकार को चेतावनी दी कि यह तो महज एक सांकेतिक प्रदर्शन है, अगर नाम बदलने की जिद नहीं छोड़ी गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा. प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें नाम परिवर्तन के मुद्दे के साथ-साथ जिले की अन्य स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विरोध के स्वर को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. मंत्री संपतिया उइके के बंगले के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने. शहर के मुख्य चौराहों पर भी पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है. फिलहाल मंडला की हवाओं में सियासी गर्मी साफ महसूस की जा सकती है. अब देखना यह होगा कि जनभावनाओं के इस उफान के बाद सरकार अपने कदम पीछे खींचती है या यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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