Maoist Announce Surrender: भारत सालों से माओवादी हिंसा की मार झेल रहा है. गांव से लेकर जंगलों तक भारत के लगभग-लगभग हर कोने में लाल आतंक ने भारत के विकास को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. भारत सरकार के लगातार कार्रवाई ने माओवादियों की कमर तोड़ दी है. हालात ऐसे हो गए हैं कि अब माओवादी संगठनों ने अचानक से हथियार डालने का ऐलान कर दिया है वो भी बिना शर्त. माओवादी संगठनों से संबंधित एक पोस्ट वायरल हो रही है. जिसमें वो चाहते हैं कि सरकार तुरंत ये ऑपरेशन रोक दे और कोई एनकाउंटर ना हो.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाकपा (माओवादी) ने अचानक हथियार डालने का ऐलान किया है. सगंठन के आधिकारिक प्रवक्ता अभय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर हथियार छोड़ने की बात कही है.

1 महीने का मांगा समय
जारी पत्र में माओवादियों के प्रवक्ता अभय ने लिखा है कि अगर सरकार राजी हो जाती है तो वो शांति प्रक्रिया में शामिल हो जाएंगे. यह पत्र 15 अगस्त 2025 को जारी किया गया था, लेकिन ये खबर 16 सितंबर को सामने आई. जिसके बाद मीडिया में इसकी बातें हो रही हैं. भाकपा (माओवादी) के प्रवक्ता अभय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर बिना शर्त सरेंडर और अस्थाई युद्ध विराम की बातें कही है. इसके लिए उसने 1 महीने का समय मांगा है जिससे वो अपने नेताओं और कैडरों से सलाह मशविरा कर सके. बताया जा रहा है कि ये पत्र छत्तीसगढ़ में पत्रकारों को सौंपा गया है.

मार्च 2026 है नक्सल मुक्त भारत की डेडलाइन
गौरतलब है कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने भारत को नक्सल मुक्त बनाने की डेडलाइन मार्च 2026 रखी है. इसको पूरा करने के लिए देश के सुरक्षाबलों ने माओवादियों के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया है. उन्होंने माओवादियों को हथियार डालने की चेतावनी दी है. अमित शाह ने दंतेवाड़ा में कहा था कि, “सरेंडर करो और बस्तर के विकास में शामिल हो जाओ”. उन्होंने सरेंडर करने वाले गांवों के विकास में 1 करोड़ रुपये का फंड देने का भी वादा किया था. 2025 में ही अबतक 521 माओवादी सरेंडर कर चुके हैं.
जंगलों में बह रहा खून…
माओवादी प्रवक्ता अभय ने अपने पत्र में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए लिखा है कि, जंगलों में खून बह रहा है. इसे रोकने की जरूरत है. उसने पत्र में कहा है कि माओवादी मार्च से ही हथियार डालने की दिशा में काम कर रहे हैं. उन्होंने सीजफायर का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन गृहमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया. उल्टे सैनिकों ने माओवादियों के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर दिया.
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ऑपरेशन कगार ने तोड़ दी नक्सलियों की कमर
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 से छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन कगार चला रखा है. सुरक्षाबलों और पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में अबतक 31 माओवादी मार गिराये गए हैं. मई 2025 में मुंडेकोटा एनकाउंटर में 1 करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता बसवराज सहित कुल 28 माओवादी मारे गए थे.
-भारत एक्सप्रेस
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