Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

Ministers Removal Bill: मंत्रियों की बर्खास्तगी का नया नियम तैयार, जानिए क्यों डरा हुआ है विपक्ष?

संसद में मंत्रियों की गिरफ्तारी और पद से हटाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

Parliament Monsoon Session 2025

Ministers Removal Bill: संसद में इस वक्त संविधान संशोधन से जुड़े एक अहम प्रस्ताव को लेकर काफी चर्चा है. संविधान के 13वें संशोधन विधेयक का मसला फिलहाल संसद की संयुक्त समिति यानी जेपीसी के पास विचाराधीन है. इस प्रस्ताव में सबसे बड़ा और विवादित प्रावधान यह है कि अगर किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार कर 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, तो वह अपने आप पद से हट जाएगा.

सूत्रों के मुताबिक, जेपीसी इस पूरे प्रस्ताव पर अपनी रिपोर्ट 17 जुलाई को पारित कर सकती है. खास बात यह है कि रिपोर्ट में इस विवादित प्रावधान को बरकरार रखने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, साथ ही समिति कुछ ऐसे सुझाव भी जोड़ सकती है जिससे किसी भी तरह के राजनीतिक दुरुपयोग को रोका जा सके.

जानकारी के अनुसार, संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि इसी सत्र में इस विधेयक पर चर्चा कर इसे पारित भी करा लिया जाए. यह विधेयक पिछले साल अगस्त में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया था. इसके बाद इसकी जांच के लिए 31 सदस्यीय जेपीसी बनाई गई, जिसकी अध्यक्षता अपराजिता सारंगी कर रही हैं.

हालांकि, इस समिति की शुरुआत से ही राजनीतिक विवाद जुड़ा रहा है. कांग्रेस समेत विपक्ष के इंडिया ब्लॉक के कई दलों ने जेपीसी का बहिष्कार किया था. उनका कहना था कि इस तरह की समितियों में शामिल होने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि सरकार उनके सुझावों को गंभीरता से नहीं लेती.

विपक्ष और सत्ता पक्ष की दलीलें

दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का कहना है कि अगर किसी मंत्री को गंभीर अपराध के मामले में गिरफ्तार किया जाता है और वह लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए. उनका तर्क है कि यह प्रावधान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, बल्कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करता है.

सूत्र बताते हैं कि कुछ सांसदों का यह भी मानना है कि कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए स्पष्ट सुरक्षा उपाय शामिल किए जाने चाहिए. इसी वजह से जेपीसी अपनी सिफारिशों में कुछ अतिरिक्त शर्तें या सीमाएं जोड़ने पर विचार कर सकती है.

रिपोर्ट पर असहमति की संभावना

जेपीसी में सत्ता पक्ष का बहुमत माना जा रहा है, इसलिए रिपोर्ट के पारित होने की संभावना ज्यादा है. हालांकि, विपक्षी सांसद अपनी असहमति दर्ज करा सकते हैं. समिति में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी, NCP (SP) की सुप्रिया सुले और YSRCP के निरंजन रेड्डी जैसे सदस्य भी शामिल हैं, जो इस पर अलग राय रख सकते हैं.

यह भी पढ़ें:  लिवर, हार्ट और आंतें गायब… वेनेजुएला से आए देवरिया के मर्चेंट नेवी कर्मी के शव के साथ छेड़छाड़, आखिर क्या हुआ था जहाज पर?

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital