शुक्रवार (20 मार्च) को महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने बड़ा बयान दिया है. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में अधिकांश संघर्षों की जड़ स्वार्थ और प्रभुत्व की इच्छा होती है. स्थायी शांति तभी संभव है जब लोग एकता, अनुशासन और धर्म के मूल्यों को अपनाएं.
ईरान-इजराइल युद्ध को भारत खत्म करेगा- मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि दुनिया में लंबे समय से चल रहे संघर्षों को सुलझाने के कई प्रयास हुए हैं, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली. उनका मानना है कि भारत ऐसा देश है, जो शांति और सद्भाव की सोच रखता है, इसलिए दुनिया को उम्मीद है कि भारत ईरान-इजराइल जैसे विवादों को खत्म करने में मदद कर सकता है.
उन्होंने कहा कि भारत के लोग मानवता और नैतिकता के आधार पर चलते हैं, जबकि दुनिया के कई हिस्सों में ताकत और संघर्ष का माहौल है. उनके अनुसार, भारत का काम है कि वह दुनिया को सही रास्ता दिखाए और संतुलन बनाए.
मोहन भागवत ने अपने भाषण में कुछ अहम बातें भी कही:
- आज भी समाज में धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और ऊंच-नीच जैसी समस्याएं मौजूद हैं.
- धर्म सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए.
- अनुशासन और अच्छे मूल्यों को अपनाने के लिए लगातार अभ्यास जरूरी है, भले ही इसमें कठिनाइयां आएं
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RSS ने किया कार्यप्रणाली में बदलाव
इस कार्यक्रम में मोहन भागवत ने यह भी बताया कि RSS अपने काम को और बेहतर बनाने के लिए बदलाव कर रहा है. पहले संगठन में 46 प्रांत थे, अब उन्हें बढ़ाकर 86 छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर काम आसानी से हो सके. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि काम करने का तरीका वही रहेगा लोगों से जुड़कर और अच्छे उदाहरण देकर समाज में बदलाव लाना.
-भारत एक्सप्रेस
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