राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयादशमी उत्सव के पावन अवसर पर नागपुर संघ मुख्यालय में आयोजित वार्षिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने देश, संस्कृति और नई पीढ़ी को लेकर कई अहम बातें कहीं. उन्होंने अभिभावकों और समाज का आह्वान करते हुए कहा कि आज की नई पीढ़ी को ‘उचित और अनुचित’ के बीच का अंतर समझाने और सही विकल्प चुनने की कला सिखानी होगी.
उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा आज एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन चुका है और इसके खिलाफ संघ खुद पूरे देश में व्यापक अभियान चलाएगा.
‘आचरण त्यागने से हम गुलाम हुए’
सरसंघचालक ने राष्ट्र निर्माण का संकल्प दोहराते हुए कहा कि आज भारत विविधताओं का देश है और इन सभी विविधताओं को संजोते हुए सभी को एक साथ आगे बढ़ना होगा. उन्होंने युवाओं को सही आचरण अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि हमारे आचरण त्यागने के कारण ही देश का पतन हुआ था और हम गुलाम हुए थे.
डॉ. भागवत ने कहा कि देश को आजाद कराने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने जो तपस्या और त्याग किया था, आज की परिस्थितियों में भारत को समग्र विकास के पथ पर ले जाने के लिए उससे भी ज्यादा समर्पण और कड़ी मेहनत की जरूरत है.
‘कैप्टन स्मित मच्छार’ का जिक्र कर क्या बोले?
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने हाल ही में फ्लाईदुबई की फ्लाइट में यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार का यह कदम न केवल भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला था, बल्कि यह ‘हिंदू स्वभाव’ का एक सटीक उदाहरण था. उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा करना ही हिंदू का मूल स्वभाव है और इस भाव में पूरे विश्व को आपस में जोड़ने की शक्ति है.
संघ के 100 वर्षों की यात्रा पर क्या बोले?
संघ के 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए डॉ. भागवत ने बताया कि संघ अपनी पहचान और संस्कृति के आधार पर देश को सशक्त बना रहा है. शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में समाज परिवर्तन के लिए 5 प्रमुख पहल की गई हैं, जिनमें से एक ‘स्वदेशी’ को अपनाना है.
इसके साथ ही उन्होंने आर्य समाज के संन्यासी और स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने और ‘हिंदू मेला’ शुरू करने वाले राजनारायण बसु की 200वीं जयंती का जिक्र करते हुए देशवासियों को अपनी जड़ों और असली पहचान से जुड़ने का आह्वान किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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