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मध्य प्रदेश में बारिश का दोहरा रूप; पूर्वी हिस्सों में बाढ़ के हालात, तो पश्चिमी जिलों में सूखे की मार

मध्य प्रदेश में बारिश ने दो अलग तस्वीरें दिखा दी हैं. पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में भारी बारिश से बाढ़ और जलभराव के हालात हैं, जबकि पश्चिमी एमपी और मालवा अब भी सामान्य से कम बारिश से जूझ रहे हैं.

रिपोर्ट- अजय भटनागर


मध्य प्रदेश में इस समय बारिश का मिजाज कुछ ऐसा है कि एक ही प्रदेश में दो बिल्कुल अलग तस्वीरें नजर आ रही हैं. कहीं लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, तो कहीं अब तक पर्याप्त पानी नहीं गिरा है. खासकर पूर्वी और उत्तरी मध्य प्रदेश में बीते कई दिनों से बारिश ने जोर पकड़ रखा है, जबकि पश्चिमी हिस्से में हालात इसके उलटा हैं.

आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से अब तक पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से करीब 2 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है. यहां सबसे ज्यादा बारिश निवाड़ी जिले में दर्ज की गई है, जहां सामान्य से 67 फीसदी अधिक पानी गिर चुका है. दूसरी ओर पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम है. अलीराजपुर में तो हालात और चिंताजनक हैं, यहां औसत के मुकाबले 53 फीसदी कम बारिश हुई है. यही वजह है कि पूरे प्रदेश की बारिश अभी भी सामान्य से करीब 5 फीसदी पीछे चल रही है.

विंध्य-बुंदेलखंड में बाढ़ का खतरा

पूर्वी मध्य प्रदेश के विंध्य और बुंदेलखंड इलाकों में पिछले करीब एक सप्ताह से लगातार भारी बारिश हो रही है. इसका असर अब निचले इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है. कई जगह जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. उत्तरी मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में भी बारिश का दौर जारी है.

मौसम विभाग ने श्योपुर, शिवपुरी और गुना के लिए अत्यधिक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. वहीं सतना, रीवा, टीकमगढ़, छतरपुर, मंदसौर और रतलाम में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट है. प्रदेश के बाकी हिस्सों में भी हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है.

मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का असर अगले दो से तीन दिनों तक बना रह सकता है. इस दौरान पूर्वी और उत्तरी मध्य प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. इसके विपरीत अरब सागर में फिलहाल कोई प्रभावी सिस्टम नहीं बनने के कारण पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश कमजोर बनी हुई है.

बारिश की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिवपुरी में आज 152 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. भारी बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

प्रदेश के कई हिस्सों में बने बाढ़ के हालात को देखते हुए राज्य सरकार भी लगातार निगरानी कर रही है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित राज्य आपदा कमान नियंत्रण केंद्र पहुंचकर प्रदेश में राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की. इस दौरान होमगार्ड के सभी जिला कमांडेंट वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखने और जरूरत के मुताबिक तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि अतिवृष्टि के कारण बने हालात में अब तक एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने 2,783 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है. मुख्यमंत्री ने बचाव दलों के काम की सराहना भी की.

नदियां उफान पर, कई डैम के गेट खोले गए

लगातार बारिश का असर प्रदेश की नदियों और जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है. नर्मदा समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं. प्रदेश के कई बांधों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ा है और कुछ डैम फुल होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं. पानी का दबाव नियंत्रित करने के लिए कई जगह डैम के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है.

भोपाल और आसपास के इलाकों में भी पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है. इसका असर बड़े तालाब पर बने भदभदा डैम पर भी पड़ा. जलस्तर फुल टैंक लेवल यानी एफटीएल से ऊपर पहुंचने के बाद प्रशासन को डैम के गेट खोलकर पानी छोड़ना पड़ा.

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-भारत एक्सप्रेस



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