Madrasa Independence Day Celebration: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मुजफ्फरनगर के सरवत इलाके में स्थित ऐतिहासिक महमूदिया मदरसे में देशभक्ति का एक अद्भुत और अप्रतिम नज़ारा देखने को मिला. 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न में मदरसे के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने हाथों में तिरंगा थामकर पूरे मुल्क को आपसी भाईचारे और देशप्रेम का कड़क पैगाम दिया. इस दौरान मदरसे के मुदर्रिस जाहिद हसन अमजद बर्लवी ने वतनपरस्ती और कौमी एकता को लेकर ऐसा ज़हरीला बयान दिया, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है.
हर साल शान से फहराते हैं तिरंगा(Madrasa Independence Day Celebration)
पिछले 20 वर्षों से महमूदिया मदरसे में तालीम दे रहे मुदर्रिस जाहिद हसन ने मीडिया से बातचीत करते हुए गर्व के साथ कहा कि 1947 में देश की आजादी के बाद से ही इस मदरसे में हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी का जश्न बेहद हर्षोल्लास और अकीदत के साथ मनाया जाता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मदरसे का हर एक बच्चा और उस्ताद देश के राष्ट्रीय पर्वों को अपनी आन-बान-शान मानता है.
बच्चों को दी जाती है शहादत की तालीम
मदरसे में दी जाने वाली शिक्षा पर बात करते हुए मौलाना ने बताया कि यहां बच्चों को दीनी तालीम के साथ-साथ मुल्क के अज़ीम स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान का पाठ पढ़ाया जाता है. उन्होंने कहा, “हम अपने बच्चों को चंद्रशेखर आजाद और राजमल जैसे महान क्रांतिकारियों की कुर्बानियों के बारे में पढ़ाते हैं ताकि उन्हें पता चले कि यह आज़ादी हमें कितनी बड़ी कीमत चुकाकर मिली है.
मौलाना ने दिया क्या पैगाम?
बातचीत के दौरान मौलाना जाहिद हसन ने कौम और मुल्क के रिश्ते पर एक ऐसी बात कही जो हर किसी के दिल को छू गई. उन्होंने कहा, “हमें बच्चों को यही सिखाना है कि ‘मुल्क है तो हम हैं’. अगर हमारा देश सुरक्षित और मजबूत है, तभी हमारा अस्तित्व बचा रहेगा. इसलिए वतन की हिफाज़त और उसकी तरक्की हम सबके लिए सबसे ऊपर होनी चाहिए.
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बच्चों ने दिया भाईचारे का संदेश
स्वतंत्रता दिवस के इस जश्न के दौरान मदरसे का पूरा प्रांगण ‘भारत माता की जय’ और देशभक्ति के तरानों से गूंज उठा. नन्हें-मुन्हें बच्चों ने हाथों में तिरंगा लहराकर यह साबित कर दिया कि देश की मिट्टी से मोहब्बत हर नागरिक के खून में दौड़ती है. कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द और सामाजिक सद्भाव की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली.
-भारत एक्सप्रेस
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