Bharat Express DD Free Dish

‘जीप नहीं, खच्चर चाहिए’; जब इंदिरा गांधी की योजना आयोग से हुई थी भिड़ंत, पीएम मोदी ने राज्यसभा में सुनाया किस्सा

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस की कार्यशैली पर प्रहार किया है. योजना आयोग से जुड़ा इंदिरा गांधी का किस्सा सुनाकर उन्होंने सिस्टम की पुरानी खामियां गिनाईं.

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पुराने तेवर में नजर आए. उन्होंने न सिर्फ अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया, बल्कि पुराने दौर की फाइलों से एक ऐसा दिलचस्प किस्सा भी निकाला जिसने कांग्रेस की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया. पीएम मोदी का संदेश साफ था कि अब भारत रुकने वाला नहीं है और ना ही पुरानी गलतियों को दोहराने वाला है.

पीएम मोदी ने सदन में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक वाकया साझा किया, जो उस समय के ‘प्लानिंग कमीशन’ (योजना आयोग) के काम करने के तरीके पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. उन्होंने बताया कि कैसे एक बार इंदिरा गांधी खुद पहाड़ी इलाकों की समस्याओं को लेकर परेशान थीं.

उस समय प्लानिंग कमीशन पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग नीति बनाने को तैयार नहीं था. पीएम ने बताया कि इंदिरा गांधी ने खुद सुनाया था कि उन्हें आयोग से काफी संघर्ष करना पड़ा क्योंकि वहां बैठे अधिकारी जमीन की हकीकत नहीं समझते थे. पहाड़ों पर सामान ढोने के लिए मजदूरों को खच्चरों की जरूरत थी, लेकिन योजना आयोग की फाइलें कहती थीं कि पैसा सिर्फ जीप के लिए मिलेगा, खच्चर के लिए नहीं, क्योंकि ऐसी कोई पॉलिसी ही नहीं थी. मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि इंदिरा जी जानती थीं कि सिस्टम में गड़बड़ी है, लेकिन उन्होंने इसे सुधारने की कोशिश नहीं की.

बदलती सोच का प्रतीक

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्लानिंग कमीशन की खामियां खुद इंदिरा गांधी गिनाती थीं, उसे उनके पिता (पंडित नेहरू) ने ही बनाया था. दशकों तक देश इसी ‘रिमोट कंट्रोल’ वाली व्यवस्था से चलता रहा, जहां दिल्ली में बैठकर जमीन की जरूरतें तय की जाती थीं. पीएम ने कहा,

“2014 में हमें मौका मिला तो हमने इस ढांचे को ही खत्म कर दिया और ‘नीति आयोग’ बनाया, जो आज राज्यों के साथ मिलकर तेज गति से काम कर रहा है.”

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा कि 2014 से पहले ‘फोन बैंकिंग’ का दौर था, जहां बड़े नेताओं के एक कॉल पर बड़े-बड़े लोन बांट दिए जाते थे. इसका नतीजा यह हुआ कि बैंकों का एनपीए (NPA) आसमान छूने लगा और बैंकिंग सेक्टर डूबने की कगार पर पहुंच गया.

मोदी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने बैंकिंग रिफॉर्म्स किए और आज नतीजा सबके सामने है. एनपीए घटकर 1% से भी कम रह गया है. उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) का उदाहरण देते हुए कहा कि जो कंपनियां कांग्रेस के दौर में बदहाल थीं, वे आज रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं और ‘मेक इन इंडिया’ की रीढ़ बनी हुई हैं.

छोटे किसानों और आम आदमी पर फोकस

अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘किसान सम्मान निधि’ के जरिए अब तक किसानों के खातों में 4 लाख करोड़ रुपये सीधे भेजे जा चुके हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार का मुख्य फोकस छोटे किसानों और उन लोगों पर है जिन्हें दशकों तक नजरअंदाज किया गया. बिना गारंटी वाले ‘मुद्रा लोन’ का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे आज एक आम आदमी सम्मान के साथ अपना रोजगार शुरू कर पा रहा है.

ये भी पढ़े: ‘खड़गे जी बैठकर नारे लगाएं, कष्ट न हो…’ राज्यसभा में मोदी ने ली चुटकी, तो विपक्ष ने कर दिया वॉकआउट

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read