नई दिल्ली के द्वारका स्थित सीबीएसई मुख्यालय में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नशे के दुरुपयोग की रोकथाम और नशामुक्त स्कूल वातावरण बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इस अवसर पर 500 से अधिक प्रिंसिपल और काउंसलर मौजूद रहे.
वेप्स के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई गई
एनसीबी के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने कहा कि विद्यालय नशे के खिलाफ पहली पंक्ति की सुरक्षा हैं. उन्होंने जागरूकता अभियानों, वर्कशॉप और काउंसलिंग के लिए एनसीबी के समर्थन का आश्वासन दिया. उन्होंने मानस हेल्पलाइन – 1933 की जानकारी देते हुए बताया कि नागरिक नशा तस्करी से जुड़ी सूचना साझा कर सकते हैं या परामर्श व पुनर्वास सहायता ले सकते हैं, उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. उन्होंने युवाओं में बढ़ते वेप्स के उपयोग पर चिंता जताई और कहा कि इसका निर्माण, आयात-निर्यात और विज्ञापन कानूनन प्रतिबंधित है.
अभिभावकों को संसाधन उपलब्ध कराने पर दिया जोर
सीबीएसई चेयरपर्सन राहुल सिंह ने कहा कि एक सतर्क शिक्षक आसानी से पहचान सकता है कि कोई बच्चा नशे की चपेट में है. उन्होंने विद्यार्थियों के कल्याण के लिए स्कूलों, शिक्षकों और अभिभावकों को संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया.
समझौते के तहत त्रैमासिक जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण, ई-मॉड्यूल, सामुदायिक संपर्क और परामर्श सेवाएँ शामिल हैं. प्रारंभिक चरण में 100 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा.
कार्यक्रम में एफसीआई सीएमडी अशुतोष अग्निहोत्री और एनसीबी उप महानिदेशक डॉ. अनीस सी. के सत्र हुए. अंत में प्रश्नोत्तर सत्र में शिक्षकों और विशेषज्ञों ने व्यावहारिक रणनीतियों पर चर्चा की.
यह पहल NCB और CBSE की साझा दृष्टि को दर्शाती है- एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त स्कूल वातावरण की ओर.
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-भारत एक्सप्रेस
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