New Labour Codes 2025: सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को सीमित करके अब 4 नए लेबर कोड्स लागू कर दिए हैं. इन नए नियमों के तहत सैलरी से लेकर ग्रेच्युटी और पीएफ तक के प्रावधान बदल गए हैं. खास बात यह है कि अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारी, कॉन्ट्रैक्ट वर्कर और गिग वर्कर भी सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आ गए हैं. यानी ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को सुरक्षा और फायदे मिलेंगे.
सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि नए वेतन कानून के तहत ‘मजदूरी’ में बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग भत्ता शामिल होगा. कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कुल सैलरी का कम से कम 50% इन्हीं हिस्सों से जुड़ा हो. इसका सीधा असर PF, ग्रेच्युटी और अन्य बेनिफिट्स पर पड़ेगा.
टेक-होम सैलरी पर असर
हालांकि, इसका मतलब यह भी है कि कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी यानी हाथ में आने वाला मासिक वेतन कम हो सकता है. नांगिया समूह की पार्टनर अंजलि मल्होत्रा ने कहा कि अब ग्रेच्युटी, पेंशन और सोशल सिक्योरिटी में योगदान बढ़ेगा, जिससे टेक-होम घटेगा.
रिटायरमेंट सिक्योरिटी होगी मजबूत
इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की सुचिता दत्ता ने कहा कि इस बदलाव का मकसद सैलरी की परिभाषा को एक समान करना है. इससे कर्मचारियों को ज्यादा ग्रेच्युटी और PF मिलेगा, यानी रिटायरमेंट सिक्योरिटी मजबूत होगी. लेकिन अगर नियोक्ता लागत की भरपाई के लिए भत्तों में कटौती करते हैं, तो टेक-होम वेतन और कम हो सकता है.
एक्सपर्ट्स की राय
ईवाई इंडिया के पुनीत गुप्ता ने बताया कि अब ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन मजदूरी के आधार पर होगा, जिसमें बेसिक सैलरी और ज्यादातर भत्ते शामिल होंगे. इससे कर्मचारियों को लंबे समय में फायदा मिलेगा, लेकिन फिलहाल मासिक टेक-होम सैलरी कम हो सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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