देश में जीएसटी (GST) परिषद द्वारा किए गए संशोधन ने आम जनता से लेकर किसानों तक राहत की नई उम्मीदें जगा दी हैं. स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म का जो संकल्प लिया था, वह अब जमीन पर उतरता दिख रहा है. रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं पर टैक्स घटने से आम उपभोक्ता को सस्ते दामों पर सामान मिल रहा है वहीं व्यापारियों और उद्योग जगत को भी प्रतिस्पर्धा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं.
सस्ते हुए ट्रैक्टर और कृषि उपकरण
अब गृहिणियों का बजट भी मुस्कुरा रहा है. खाने-पीने की चीजों से लेकर घरेलू सामान तक सस्ते हुए हैं. किसानों को तो जैसे राहत की सौगात मिल गई है. पहले 35 हार्सपावर का ट्रैक्टर खरीदने में करीब 6.5 लाख रुपये लगते थे, अब वही ट्रैक्टर 6.09 लाख में मिल रहा है. यानी सीधे 41 हजार की बचत! 45 एचपी ट्रैक्टर पर 45 हजार, 50 एचपी पर 53 हजार और 75 एचपी ट्रैक्टर पर करीब 63 हजार रुपये की राहत मिली है. पावर टिलर, धान रोपण यंत्र, प्रेशर पंप, सीड-ड्रिल, मल्चर, सुपरसीडर, हैप्पीसीडर और स्प्रेयर जैसे उपकरण भी अब सस्ते हो गए हैं.
खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए मशीनीकरण जरूरी है. स्प्रिंकलर, ड्रिप इरिगेशन, कटाई मशीन, हाइड्रोलिक पंप और कलपुर्जों पर टैक्स घटने से सीमांत किसान भी आधुनिक उपकरण खरीद पाएंगे. इससे मेहनत कम होगी, समय बचेगा और पैदावार बढ़ेगी. खर्च घटेगा तो आमदनी बढ़ेगी ही.
उत्तर भारत के राज्यों के लिए जीएसटी राहत पैकेज
जम्मू-कश्मीर के किसानों को बागवानी, अखरोट, चेरी और केसर उद्योग में टैक्स राहत से बड़ा फायदा हुआ है. हिमाचल की कांगड़ा चाय, कुल्लू शॉल और कांगड़ा पेंटिंग्स पर टैक्स घटाकर 5प्रतिशत कर दिया गया है. उत्तराखंड के तेजपत्ता, मुनस्यारी राजमा और नैनीताल की लीची को भी राहत मिली है.
कारीगरों और किसानों के लिए राहत
झारखंड की सोहराय खोवर पेंटिंग, ढोकरा कला और तसर रेशम, तमिलनाडु की इरोड हल्दी, तंजावुर पेंटिंग और टेक्सटाइल उद्योग, छत्तीसगढ़ की बस्तर आयरन क्राफ्ट और चांपा सिल्क साड़ियां, केरल की मलाबार काली मिर्च और वयनाड कॉफी इन सब पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू हुआ है. इससे स्थानीय कारीगरों और किसानों को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा.
भारतीय उत्पादों के लिए नई राहें
आंध्र प्रदेश के गुंटूर मिर्च, तिरुपति लड्डू, पुडुचेरी की टेराकोटा कला, कर्नाटक की मैसूर सिल्क और चन्नपटना टॉयज, महाराष्ट्र की कोल्हापुरी चप्पल और अल्फांसो आम, पंजाब की फुलकारी और मखाना, हरियाणा के बासमती चावल और सौर उपकरण, बिहार के वस्त्र और डेयरी उत्पाद, उत्तर प्रदेश के खेल सामग्री और चमड़ा उद्योग इन सभी को टैक्स में राहत मिली है.
गुजरात और महाराष्ट्र के लिए नई संभावनाएं
गुजरात के कपड़ा और डायमंड सेक्टर को भी बड़ी राहत मिली है. उत्पादन लागत घटेगी, निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. महाराष्ट्र में ऑटोमोबाइल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को नई गति मिली है.
सबका साथ, सबका विकास
यह सब दर्शाता है कि सरकार का फोकस सिर्फ बड़े उद्योगों पर नहीं बल्कि गांव, किसान, कारीगर और आम जनता की खुशहाली पर है. ‘सबका साथ-सबका विकास’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को साकार करने की दिशा में यह बड़ा कदम है.
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अबकी बार दीपावली पर देशवासी स्वदेशी सामानों के साथ त्योहार मनाएंगे. हर घर में खुशहाली होगी और हर खेत में हरियाली होगी. यही है नए भारत की पहचान, आत्मनिर्भरता, समृद्धि और स्वदेशी गर्व के साथ आगे बढ़ता राष्ट्र.
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-भारत एक्सप्रेस
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