बुधवार, 26 नवंबर 2025 को संविधान दिवस (Constition Day) मनाया गया. इस मौके पर इस बार एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया. इससे देश की भाषाई विविधता और सबको साथ लेकर चलने की भावना को और मजबूती मिलेगी.
संसद में संविधान समारोह
दरअसल 26 नवंबर को संसद के सेंट्रल हॉल में 150 वां संविधान दिवस मनाया गया. इस विशेष अवसर पर संसद में समारोह का आयोजन किया गया. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और दोनों सदनों के सांसद शामिल रहे.
इस समारोह के दौरान एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर संविधान की नई प्रतियां जारी की. ये प्रतियां 9 नई भाषाओं मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया में जारी की गई.
कश्मीर से लेकर बोडोलैंड, संविधान लगातार मजबूत
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा एक्स पर पोस्ट किया. इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, जम्मू-कश्मीर और बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के हमारे भाइयों और बहनों को संविधान दिवस पर माननीय भारत के राष्ट्रपति द्वारा कश्मीरी और बोडो भाषाओं में भारतीय संविधान के शुभारंभ पर हार्दिक बधाई.
उन्होंने ये भी लिखा कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि सुनिश्चित करेगी कि इन क्षेत्रों के लोग संविधान के मूल्यों को आत्मसात करें और उन्हें हमारे राष्ट्रीय जीवन की आत्मा बनाएं.
उन्होंने आगे लिखा, ‘मोदी जी ने संविधान को जमीनी स्तर पर लागू करके इन क्षेत्रों में शांति और प्रगति का एक नया युग आरंभ किया है. नए अनुवाद इन प्रयासों को एक नई गति प्रदान करेंगे.’
क्यों खास है संविधान दिवस?
आपको बता दें कि 26 नवंबर को साल 1949 को भारत का संविधान तैयार हुआ था, जो केवल एक किताब नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र की नींव है. ये न केवल शासन व्यवस्था को परिभाषित करता है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों, स्वतंत्रताओं और कर्तव्यों को भी निर्धारित करता है. संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समता, और बंधुत्व जैसे मूल्यों से जोड़ता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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