Israel Iran Conflict: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार हालात पर बारीकी से नजर रख रही है. पीएमओ और प्रमुख मंत्रालय लगातार समीक्षा कर रहे हैं. अधिकारियों का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा चला तो तेल की ऊंची कीमतें, बढ़ता घाटा और कमजोर रेमिटेंस फ्लो भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्यों के दौरे से लौटने के बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक की अध्यक्षता की.
इजराइल-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई
शनिवार सुबह इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला किया. दर्जनों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है.
तेल और रुपए पर असर
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत एशिया की उन अर्थव्यवस्थाओं में से है, जिस पर तेल की ऊंची कीमतों का असर सबसे ज्यादा पड़ता है. नोमुरा की सोनल वर्मा ने कहा कि भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है. स्टैंडर्ड चार्टर्ड की अनुभूति सहाय ने कहा कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और जोखिम की भावना रुपए पर दबाव डाल सकती है, हालांकि आरबीआई के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 82 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं. शुक्रवार को विदेशी फंड के बाहर जाने से रुपया डॉलर के मुकाबले 17 पैसे गिरकर 91.08 पर आ गया. वर्मा ने कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा पंप कीमतें तुरंत न बढ़ाने से महंगाई पर असर सीमित रह सकता है, लेकिन विदेशी निवेश के बाहर जाने से कैपिटल अकाउंट पर दबाव बढ़ सकता है.
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इकोनॉमी पर संभावित असर
कुछ लोगों का कहना है कि अभी मजबूत घरेलू आउटलुक राहत देता है लेकिन अगर संघर्ष लंबा चला तो महंगाई, दोहरे घाटे और रेमिटेंस पर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह जोखिम फिलहाल शॉर्ट-टर्म है और मैनेज किया जा सकता है, लेकिनस्थिति कितनी लंबी चलती है, इस पर भारत की अर्थव्यवस्था का दबाव निर्भर करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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