आज का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. 12 मार्च, 1930 को ही महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से समुद्र तट तक की वह ऐतिहासिक पदयात्रा शुरू की थी, जिसे हम ‘दांडी मार्च’ के नाम से जानते हैं. इस महान संघर्ष की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस दौर के सत्याग्रहियों और विभूतियों को याद करते हुए एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है.
महान विभूतियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर देशवासियों के साथ अपनी भावनाएं साझा कीं. उन्होंने लिखा, “1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी. इस आंदोलन में शामिल सभी महान विभूतियों का मैं श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं.”
सन् 1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण!
सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥ pic.twitter.com/8xIDgxvx9y
— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026
पोस्ट के आखिर में पीएम मोदी ने मुण्डकोपनिषद् का एक सुभाषितम् भी साझा किया:
सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः ।
येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम् ।।
क्या है श्लोक का अर्थ?
इस सुभाषितम् का अर्थ है कि जीत हमेशा सत्य की ही होती है, झूठ की नहीं. सत्य का मार्ग ही वह दिव्य मार्ग है जिस पर चलकर ऋषियों ने परमानंद और उस परम सत्य को प्राप्त किया. बापू का नमक सत्याग्रह भी इसी सत्य और अहिंसा की शक्ति का प्रमाण था.
अमित शाह ने भी किया नमन
प्रधानमंत्री के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दांडी मार्च के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि गांधी जी की इस यात्रा ने समाज के हर आयु और वर्ग के भीतर आजादी की अलख जगा दी थी. यह स्वदेशी की दिशा में एक ऐसा क्रांतिकारी कदम था, जिसने पूरे स्वाधीनता आंदोलन का रुख ही बदल दिया.
वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साबरमती आश्रम से शुरू हुए इस आंदोलन को अंग्रेजों के दमनकारी नमक कानून के खिलाफ एक करारा प्रहार बताया. उन्होंने कहा कि 1930 का वह दिन भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है.
सामूहिक संकल्प से साम्राज्य भी डगमगाते
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर बापू और सभी सत्याग्रहियों को नमन किया. उन्होंने अपने संदेश में कहा कि दांडी मार्च ने यह साबित कर दिया था कि अगर संकल्प सामूहिक हो और मन में साहस हो, तो दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य भी डगमगा सकता है. योगी ने इसे भारतीय जनमानस के आत्मबल और स्वराज का नया मंत्र बताया, जिसने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं.
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-भारत एक्सप्रेस
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