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क्यों खास है ‘नमोह 108’ कमल? पीएम मोदी ने वियतनामी राष्ट्रपति को दी भारत की अनमोल विरासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम को उनके भारत दौरे पर उत्तर प्रदेश की खास विरासत से रूबरू कराया. तोहफों में लखनऊ में विकसित ‘नमोह 108’ कमल, मुरादाबाद की बनी पीतल की बुद्ध प्रतिमा और वाराणसी का मशहूर बनारसी सिल्क शामिल रहा.

PM Modi gifts 'Namoh 108' Lotus and Banarasi Silk to Vietnam President To Lam.

जब भी कोई विदेशी मेहमान भारत आता है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश रहती है कि उन्हें तोहफे में भारत की उस ‘मिट्टी’ की खुशबू दी जाए, जो सदियों पुरानी परंपरा और आधुनिक भारत की प्रगति, दोनों को समेटे हो. वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम के भारत दौरे के दौरान भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. पीएम मोदी ने उन्हें जो तोहफे दिए, उनमें उत्तर प्रदेश की कारीगरी, अध्यात्म और विज्ञान का एक अद्भुत संगम नजर आता है.

‘नमोह 108’: सिर्फ एक फूल नहीं

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति टो लैम को कमल के फूल की एक बेहद खास किस्म ‘नमोह 108’ भेंट की. ये कोई साधारण कमल नहीं है. इसे लखनऊ के नेशनल बॉटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NBRI) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी 108 पंखुड़ियां हैं.

भारतीय संस्कृति में 108 की संख्या का महत्व किसी से छिपा नहीं है. चाहे वह ध्यान की माला के मोती हों या पवित्र पीठ, यह संख्या हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में ‘परफेक्ट’ मानी जाती है. ‘नमोह’ नाम संस्कृत के ‘नमन’ शब्द से आया है, जो सम्मान और प्रार्थना का प्रतीक है. यह कमल हमारी प्राचीन विरासत और आज की बायोटेक्नोलॉजी के बीच एक ‘लिविंग ब्रिज’ जैसा है.

मुरादाबाद का पीतल

वियतनाम एक ऐसा देश है जहां बौद्ध धर्म की गहरी जड़ें हैं. इसी जुड़ाव को सम्मान देते हुए पीएम मोदी ने राष्ट्रपति को बुद्ध की एक बेहद खूबसूरत पीतल की मूर्ति तोहफे में दी. इस मूर्ति में बुद्ध ‘अभय मुद्रा’ में नजर आ रहे हैं, जो निडरता और सुरक्षा का संदेश देता है. उनके पीछे बोधि वृक्ष की बारीक पत्तियों वाला एक सुंदर घेरा है.

इस मूर्ति को मुरादाबाद के कुशल कारीगरों ने बनाया है. पीतल नगरी के नाम से मशहूर मुरादाबाद की यह कला पीढ़ियों पुरानी है, जो आज भी अपनी बारीकी के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

बनारसी सिल्क की शाही चमक

तोहफों की इस फेहरिस्त में वाराणसी की विश्व प्रसिद्ध बनारसी सिल्क का कपड़ा भी शामिल रहा. सदियों से बनारस अपनी बेहतरीन बुनाई और शाही ब्रोकेड के लिए जाना जाता है. राष्ट्रपति टो लैम को दिए गए इस कपड़े पर ‘जैक्वार्ड’ बुनाई के जरिए फूलों और बेलों का बेहद महीन पैटर्न उकेरा गया है. ये सिल्क न केवल भारत की कपड़ा कला की पहचान है, बल्कि वियतनाम और भारत के बीच बुने जा रहे मजबूत रिश्तों के रेशों को भी दर्शाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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