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पीएम मोदी का मिशन इंडो-पैसिफिक! 6 जुलाई से 3 देशों की यात्रा पर जाएंगे, भारत की सामरिक, आर्थिक और प्रवासी कूटनीति को देंगे नई दिशा

PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई 2026 के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण देशों- इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर जाने की संभावना है. यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है.

PM Modi Indonesia Visit

PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई 2026 के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण देशों- इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर जाने की संभावना है. यह यात्रा केवल द्विपक्षीय बैठकों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक में भारत की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करना, व्यापार एवं निवेश बढ़ाना, रक्षा सहयोग को नई गति देना तथा भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संपर्क को और गहरा करना होगा.

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक राजनीति, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) और आर्थिक प्रतिस्पर्धा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. भारत अपनी “एक्ट ईस्ट नीति”, इंडो-पैसिफिक विजन और सागर (Security and Growth for All in the Region) नीति के तहत इस क्षेत्र में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है.

यात्रा का संभावित कार्यक्रम

पहला चरण: इंडोनेशिया (6-8 जुलाई)

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की शुरुआत इंडोनेशिया से होने की संभावना है. यह यात्रा कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

राष्ट्रपति के साथ शिखर वार्ता

प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें निम्नलिखित विषय प्रमुख रह सकते हैं-

  • समुद्री सुरक्षा (Maritime Security)
  • हिंद महासागर में सहयोग
  • रक्षा उत्पादन
  • आतंकवाद विरोधी सहयोग
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था
  • ऊर्जा सुरक्षा
  • स्वास्थ्य क्षेत्र
  • आर्थिक सहयोग
  • दोनों देश व्यापार बढ़ाने पर जोर देंगे.

संभावना है कि निवेश समझौते, डिजिटल भुगतान सहयोग, बंदरगाह विकास, हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) पर नई घोषणाएं हो सकती हैं. इसके साथ नई दिल्ली आसियान (ASEAN) के साथ जुड़ाव को लेकर भी जकार्ता के साथ महत्वपूर्ण समझौता कर सकती है.

बता दें कि, इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा देश है और आसियान का प्रमुख सदस्य है. भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत इंडोनेशिया को रणनीतिक साझेदार मानता है.

दूसरा चरण: ऑस्ट्रेलिया (8–10जुलाई)

यात्रा का दूसरा पड़ाव ऑस्ट्रेलिया होगा. भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुए हैं. यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे.

दोनों नेताओं के बीच चर्चा के मुख्य विषय हो सकते हैं-

  • रक्षा सहयोग
  • हिंद-प्रशांत सुरक्षा
  • QUAD सहयोग
  • साइबर सुरक्षा
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता
  • महत्वपूर्ण खनिज
  • शिक्षा
  • स्वच्छ ऊर्जा
  • व्यापार

दोनों देश व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर प्रगति की समीक्षा कर सकते हैं. इसके अलावा कृषि, शिक्षा, खनन, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला में नए सहयोग की घोषणा संभव है.

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. प्रधानमंत्री मोदी भारतीय समुदाय को संबोधित कर सकते हैं, जहां भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों, निवेश और युवाओं के अवसरों पर विशेष जोर रहेगा.

तीसरा चरण: न्यूज़ीलैंड (10–11 जुलाई)

यह यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक चरण माना जा रहा है. भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंधों में हाल के वर्षों में नई गति आई है. यहां प्रधानमंत्री स्तर की वार्ता होगी.

इस वार्ता में प्रमुख मुद्दे हो सकते हैं-

  • व्यापार
  • कृषि
  • खाद्य प्रसंस्करण
  • डेयरी क्षेत्र
  • शिक्षा
  • पर्यटन
  • विज्ञान एवं तकनीक
  • रक्षा सहयोग
  • व्यापार समझौते पर चर्चा

दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा कर सकते हैं. इसके अलावा शिक्षा सहयोग, भारत और न्यूज़ीलैंड विश्वविद्यालयों के बीच छात्र विनिमय, संयुक्त शोध, कौशल विकास पर नए समझौते हो सकते हैं.

भारतीय प्रवासी कार्यक्रम

प्रधानमंत्री मोदी भारतीय समुदाय को संबोधित कर सकते हैं. न्यूज़ीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय की भूमिका दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में लगातार बढ़ रही है.

यात्रा के दौरान संभावित समझौते

यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है—

  • रक्षा सहयोग
  • समुद्री सुरक्षा
  • डिजिटल भुगतान
  • साइबर सुरक्षा
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
  • हरित ऊर्जा
  • महत्वपूर्ण खनिज
  • शिक्षा
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • निवेश

भारत के लिए यह यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?

इंडो-पैसिफिक रणनीति

भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना चाहता है.

चीन का बढ़ता प्रभाव

क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत समान विचार वाले देशों के साथ सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है.

समुद्री सुरक्षा

हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार की रीढ़ हैं. भारत इन मार्गों की सुरक्षा और मुक्त नौवहन (Freedom of Navigation) पर लगातार जोर देता रहा है.

व्यापार

तीनों देशों के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाना भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है.

महत्वपूर्ण खनिज

इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत की रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है.

भारतीय प्रवासी

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती संख्या भारत की जन-कूटनीति (People-to-People Diplomacy) को मजबूत करती है.

भारत ने पिछले एक दशक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अपनी विदेश नीति के केंद्र में रखा है. “एक्ट ईस्ट नीति” के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ संबंधों को नई गति दी गई है, जबकि “सागर” दृष्टिकोण के तहत समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग पर विशेष बल दिया गया है. भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के बीच क्वाड सहयोग भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है.

इंडोनेशिया भारत का महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है और मलक्का जलडमरूमध्य के निकट उसकी भौगोलिक स्थिति उसे अत्यंत रणनीतिक बनाती है. ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, खनिज, शिक्षा और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. वहीं न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार, कृषि, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क को नई दिशा देने के प्रयास जारी हैं.

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ऐसे समय में जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधीकरण, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा अंतरराष्ट्रीय एजेंडा के केंद्र में हैं, प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन देशों की यात्रा भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को और मजबूत करने तथा इंडो-पैसिफिक में उसकी भूमिका को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

-भारत एक्सप्रेस



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