PM Modi Iran President Call
PM Modi Iran President Call: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से टेलीफोन पर बातचीत की. यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया पिछले कुछ महीनों से गंभीर तनाव, सैन्य टकराव और कूटनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, शांति बहाली और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था.
बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने क्षेत्र में उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों, संघर्षविराम की दिशा में हुए प्रयासों तथा आगे की संभावित कूटनीतिक प्रक्रिया से अवगत कराया. ईरान ने अपने दृष्टिकोण और क्षेत्रीय परिस्थितियों का आकलन भी साझा किया.
क्षेत्र में तनाव कम करने की बात का किया स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बनी समझ का स्वागत किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति हमेशा से संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित रही है. भारत का मानना है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और आपसी विश्वास के माध्यम से ही संभव है.
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी बल दिया कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता केवल संबंधित देशों के सहयोग और निरंतर कूटनीतिक प्रयासों से ही सुनिश्चित की जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित नौवहन (Freedom of Navigation) तथा वैश्विक व्यापार का सुचारु संचालन विश्व अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है. भारत, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, उसके लिए समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है.
बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील
पश्चिम एशिया में हाल के समय में ईरान और इज़राइल के बीच तनाव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया. दोनों देशों के बीच सैन्य हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई थी. इस स्थिति का असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ा. कई देशों ने संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की.
भारत ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संतुलित और जिम्मेदार रुख अपनाया. भारत ने न तो किसी पक्ष का समर्थन किया और न ही टकराव को बढ़ावा देने वाली भाषा का प्रयोग किया. भारत लगातार यही कहता रहा कि सभी पक्ष संयम बरतें, तनाव कम करें और विवादों का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से करें.
ईरान भारत के लिए है बेहद महत्वपूर्ण
भारत और ईरान के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं. ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, संपर्क परियोजनाएँ तथा क्षेत्रीय स्थिरता दोनों देशों के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं. भारत के लिए ईरान केवल एक ऊर्जा साझेदार ही नहीं, बल्कि मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक संपर्क स्थापित करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण देश है.
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प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के बीच हुई यह बातचीत ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं. यह वार्ता भारत की उस नीति को भी रेखांकित करती है जिसके अनुसार वैश्विक और क्षेत्रीय विवादों का समाधान शांतिपूर्ण संवाद, कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और सहयोग के माध्यम से ही संभव है.
-भारत एक्सप्रेस
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