भारत के 35 लाख से ज्यादा गरीब बुनकरों और कारीगरों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक अनोखी और खास पहल की है. 7 अगस्त को मनाए जाने वाले ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ (National Handloom Day) के मौके पर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर देशवासियों, खासकर युवाओं से अपील की है कि वे स्वदेशी हैंडलूम कपड़ों के साथ अपने वीडियो बनाएं और दुनिया को भारतीय कारीगरी का दम दिखाएं!
“अपने पसंदीदा कपड़ों के साथ GRWM वीडियो शेयर करें”
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए हथकरघा क्षेत्र को ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सबसे अहम स्तंभ बताया. युवाओं से सीधे कनेक्ट करते हुए उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों और जीआरडब्ल्यूएम (GRWM – Get Ready With Me) वीडियो को जरूर शेयर करें.” पीएम का मानना है कि इस डिजिटल ट्रेंड से बुनकरों का उत्साह बढ़ेगा और उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी.
7 अगस्त का इतिहास और 72% महिलाओं का योगदान
आखिर 7 अगस्त ही क्यों? दरअसल, 1905 में आज ही के दिन अंग्रेजों के खिलाफ ‘स्वदेशी आंदोलन’ की शुरुआत हुई थी, जिसने आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी थी. साल 2015 में मोदी सरकार ने इस दिन को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ घोषित किया. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश की चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना के मुताबिक, इस सेक्टर से जुड़े 35.22 लाख बुनकरों में से 72 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, जो अपने घरों के करघों पर भारत की समृद्ध विरासत को जिंदा रखे हुए हैं.
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लोकल शिल्प पर गर्व करने का दिन
पीएम मोदी के इस विजन को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी देशवासियों से लोकल शिल्प को अपनाने की गुजारिश की है. सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर रामायण-महाभारत तक, भारतीय कपास और रेशम का डंका बजता रहा है. अब बारी आज के डिजिटल युग की है, जहां आपके एक वीडियो और हैंडलूम की खरीदारी से किसी गरीब बुनकर के घर का चूल्हा और देश का गौरव, दोनों रोशन हो सकते हैं.
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