विदेशों में छिपकर भारतीय कानून से भागने वाले अपराधियों और आतंकवादियों के खिलाफ केंद्र की मोदी सरकार ने अपना शिकंजा पूरी तरह कस दिया है. वर्ष 2019 से अब तक सरकार ने कूटनीतिक, कानूनी और वैश्विक पुलिसिंग तंत्र के समन्वय से 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने में बड़ी सफलता हासिल की है.
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, भगोड़ों का प्रत्यर्पण केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा विषय है.
‘भारतपोल’ और ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ से मजबूत हुआ तंत्र
भगोड़ों की लोकेशन ट्रैक करने और जांच एजेंसियों के बीच सूचनाओं के निर्बाध आदान-प्रदान के लिए कई संस्थागत और तकनीकी सुधार किए गए हैं:
भारतपोल (Bharatpol): जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया ‘भारतपोल’ पोर्टल सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालयों और जिला पुलिस को एकीकृत करता है. इसके 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस रियल-टाइम सूचना साझा कर रहे हैं.
ऑपरेशन त्रिशूल: इंटरपोल की मदद से चलाए गए इस ऑपरेशन के तहत सैटेलाइट सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर अपराधियों की जियो-लोकेशन ट्रैक की जाती है.
अनुपस्थिति में मुकदमा (Trial in Absentia): वर्ष 2024 में लागू नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 355 और 356 के तहत भगोड़े अपराधियों की गैरमौजूदगी में भी उन पर मुकदमा चलाने और सजा सुनाने का कानूनी प्रावधान किया गया है.
आर्थिक अपराधियों पर PMLA की सख्त मार
मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) को सख्ती से लागू करने के परिणामस्वरूप वर्ष 2019 से 2026 तक देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है. इसके साथ ही, ₹18,762 करोड़ रुपये की सफल वापसी (Restitution) कराकर बैंकों और पीड़ितों तक पहुंचाई गई है.
वापस लाए गए अपराधियों में आतंकी, गैंगस्टर, आर्थिक अपराधी, नार्कोटिक्स तस्कर, मर्डर और पॉक्सो (POCSO) मामलों के आरोपी शामिल हैं. अमेरिका से मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण भारत के धैर्यपूर्ण और मजबूत कूटनीतिक प्रयासों का सबसे बड़ा उदाहरण है.
इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई है, जो 2022 में 40 से बढ़कर 2026 में अब तक 182 तक पहुंच गई है.
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