सोमवार, 27 अप्रैल को पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्रेरक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि किसी भी राष्ट्र की असली मजबूती उसकी सेना या अर्थव्यवस्था से कहीं ज्यादा उसके नागरिकों की ‘निःस्वार्थ सेवा भावना’ में छिपी होती है.
वृक्षों से दी ‘सज्जनता’ की सीख
पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखते हुए कहा कि राष्ट्र की असली शक्ति उसके नागरिकों की निःस्वार्थ सेवा भावना में निहित है. इससे लोग एक दूसरे से प्रेरित होते हैं, साथ ही हमारा समाज भी और समृद्ध होता है.
राष्ट्र की असली शक्ति उसके नागरिकों की निःस्वार्थ सेवा भावना में निहित है। इससे लोग एक दूसरे से प्रेरित होते हैं, साथ ही हमारा समाज भी और समृद्ध होता है।
छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे।
फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव॥ pic.twitter.com/kYqB92qdsR
— Narendra Modi (@narendramodi) April 27, 2026
पोस्ट के आखिर में पीएम मोदी ने अपनी इस बात को और भी गहरा बनाने के लिए एक सुंदर संस्कृत श्लोक का सहारा लिया.
छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे ।
फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव ।।
क्या है श्लोक का अर्थ
इस श्लोक का अर्थ समझाते हुए पीएम ने बताया कि जिस तरह एक पेड़ खुद चिलचिलाती धूप में खड़ा रहता है, लेकिन दूसरों को ठंडी छाया देता है और अपने फल भी खुद नहीं खाता बल्कि दूसरों को सौंप देता है; ठीक वैसे ही समाज के ‘सत्पुरुष’ यानी नेक दिल लोग होते हैं. वे खुद कष्ट सहकर भी दूसरों के जीवन में खुशियां भरने और समाज को बेहतर बनाने का काम करते हैं.
वीडियो में दिखा प्रकृति और अध्यात्म का संगम
सिर्फ शब्द ही नहीं, बल्कि पीएम मोदी ने इसके साथ एक बेहद खूबसूरत वीडियो भी शेयर किया है. इस वीडियो में घने, हरे-भरे पेड़ों और शांत प्राकृतिक नजारों के बीच इस श्लोक को बहुत ही कलात्मक तरीके से दिखाया गया है.
वीडियो में हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में श्लोक की व्याख्या की गई है, ताकि नई पीढ़ी के युवा भी परोपकार (Altruism) के इस गहरे अर्थ को आसानी से समझ सकें.
परोपकार से बनेगा ‘सशक्त भारत’
विकास केवल ऊंचे भवनों या सड़कों से नहीं आता, बल्कि ये नागरिकों के चरित्र से आता है. त्याग और सेवा की भावना ही एक समाज को एक-दूसरे से जोड़ती है. जब हम स्वार्थ से ऊपर उठकर सार्वजनिक हित के बारे में सोचते हैं, तभी एक ‘सशक्त और समृद्ध भारत’ का सपना सच होता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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