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प्रो. (डॉ.) शाहिद अख्त़र ने अल्पसंख्यक संस्थानों को 'सामाजिक प्रयोगशाला' बताया, डॉ. इंद्रेश कुमार ने एकता और सद्भाव का दिया संदेश। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया

नई दिल्ली में आयोजित ‘सेवा संकल्प – राष्ट्रनिर्माण के 25 साल’ समारोह में सेवा, सद्भाव और राष्ट्रनिर्माण की भावना देखने को मिली.

आजादी के बाद भारत का नक्शा कभी एक जैसा नहीं रहा. रियासतों के विलय से शुरू हुई यह यात्रा भाषाई आंदोलनों, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राजनीतिक फैसलों के साथ लगातार बदलती गई. 31 अगस्त 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सुभाषित शेयर किया है.

बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार निवास में शिक्षाविदों एवं सामाजिक विचारकों के प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी की, डॉ. इन्द्रेश कुमार, प्रो. शाहिद अख़्तर और कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा के साथ हुई एक अहम बैठक, शिक्षा व्यवस्था और देश के कई ज्वलंत मुद्दों पर हुई चर्चा। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत की शैक्षिक संरचना को सुदृढ़ करना, प्रमुख राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करना और राष्ट्र-निर्माण की सामूहिक दिशा तय करना था।

अल्पसंख्यक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा क़दम: प्रो. शाहिद अख्त़र (NCMEI के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं AMU कार्यकारी परिषद में राष्ट्रपति के नामांकित सदस्य) ने कुलपतियों के साथ विचार-विमर्श में लिया भाग। मंत्री, तीनों विश्विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इन संस्थानों को भारत के समावेशी विकास के सशक्त और प्रभावी स्तंभों के रूप में और मजबूत किये जाने का रास्ता तय किया। साथ ही शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक सद्भाव के केन्द्र में विकसित भारत का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जून को सोशल मीडिया पर एकता को समर्पित एक संस्कृत श्लोक साझा किया. लकड़ियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जिस तरह मिलकर जलने से रोशनी बढ़ती है, वैसे ही नागरिकों की एकजुटता से देश की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत श्लोक के माध्यम से देशवासियों को 'निःस्वार्थ सेवा' का महत्व समझाया है. पेड़ों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरों के लिए जीना ही जीवन की असली सार्थकता है.