562 रियासतों से लेकर आज के नक्शे तक… जानिए कैसे तय हुई देश के राज्यों की दिलचस्प और संघर्ष भरी कहानी
आजादी के बाद भारत का नक्शा कभी एक जैसा नहीं रहा. रियासतों के विलय से शुरू हुई यह यात्रा भाषाई आंदोलनों, क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राजनीतिक फैसलों के साथ लगातार बदलती गई. 31 अगस्त 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ.
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित, युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्र निर्माण पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सुभाषित शेयर किया है.
दिल्ली के बिहार निवास में बिहार के राज्यपाल की उच्च-स्तरीय बैठक: शिक्षा सुधार और राष्ट्र-निर्माण की दिशा तय
बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार निवास में शिक्षाविदों एवं सामाजिक विचारकों के प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी की, डॉ. इन्द्रेश कुमार, प्रो. शाहिद अख़्तर और कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा के साथ हुई एक अहम बैठक, शिक्षा व्यवस्था और देश के कई ज्वलंत मुद्दों पर हुई चर्चा। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत की शैक्षिक संरचना को सुदृढ़ करना, प्रमुख राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करना और राष्ट्र-निर्माण की सामूहिक दिशा तय करना था।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एएमयू, जामिया मिल्लिया और मानू(MANUU) के कुलपतियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर शैक्षणिक उत्कृष्टता और ‘विकसित भारत’ विज़न को दी नई दिशा
अल्पसंख्यक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा क़दम: प्रो. शाहिद अख्त़र (NCMEI के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं AMU कार्यकारी परिषद में राष्ट्रपति के नामांकित सदस्य) ने कुलपतियों के साथ विचार-विमर्श में लिया भाग। मंत्री, तीनों विश्विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इन संस्थानों को भारत के समावेशी विकास के सशक्त और प्रभावी स्तंभों के रूप में और मजबूत किये जाने का रास्ता तय किया। साथ ही शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक सद्भाव के केन्द्र में विकसित भारत का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
‘अलग हुए तो सिर्फ धुआं देंगे, साथ रहे तो उगलेंगे आग…’ पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक से समझाया एकजुटता का असली महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जून को सोशल मीडिया पर एकता को समर्पित एक संस्कृत श्लोक साझा किया. लकड़ियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जिस तरह मिलकर जलने से रोशनी बढ़ती है, वैसे ही नागरिकों की एकजुटता से देश की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है.
परोपकार ही राष्ट्र की असली शक्ति: पीएम मोदी ने श्लोक के जरिए दिया सेवा का संदेश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत श्लोक के माध्यम से देशवासियों को 'निःस्वार्थ सेवा' का महत्व समझाया है. पेड़ों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरों के लिए जीना ही जीवन की असली सार्थकता है.





