प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (15 जून) की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया. इस श्लोक के जरिए उन्होंने न सिर्फ भारत की सदियों पुरानी ‘विविधता में एकता’ की संस्कृति को याद किया, बल्कि यह भी समझाया कि कैसे अलग-अलग सोच और नए विचार किसी भी देश की तरक्की की असली बुनियाद होते हैं. प्रधानमंत्री का यह संदेश इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है.
क्या है वह श्लोक और उसका असल मतलब?
पीएम मोदी ने एक बेहद खूबसूरत एनिमेटेड वीडियो के साथ इस सुभाषित को पोस्ट किया:
पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः ।
जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे ।।
पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः।
जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥ pic.twitter.com/KZHjUsEMzb
— Narendra Modi (@narendramodi) June 15, 2026
इस गहरे दार्शनिक श्लोक का सीधा और सरल अर्थ यह है कि इस दुनिया में हर इंसान की बुद्धि, समझ और सोचने का नजरिया बिल्कुल अलग होता है. ठीक वैसे ही, जैसे आपको हर जलाशय या कुएं के पानी का स्वाद थोड़ा बदला हुआ और नया मिलता है. समाज में हर समूह के अपने आचार-विचार होते हैं और हर व्यक्ति के मुख से एक अनूठी वाणी यानी विचार निकलते हैं.
विविधता से ही निकलता है तरक्की का रास्ता
पीएम मोदी ने कहा कि आज के समय में हर व्यक्ति की रचनात्मकता और काम करने का ढंग अलग है. जब अलग-अलग क्षेत्रों की ऐसी ही अनूठी प्रतिभाएं और उनके भिन्न-भिन्न विचार एक साथ मिलते हैं, तभी नई संभावनाओं के द्वार खुलते हैं.
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि विविधता ही इस पूरी सृष्टि का शाश्वत नियम है. जैसे हर जल-स्रोत का अपना एक खास महत्व होता है, वैसे ही हर व्यक्ति की अनूठी क्षमता देश के विकास में अपना योगदान देती है. इस विविधता को गले लगाकर और सबके विचारों का सम्मान करते हुए आगे बढ़ना ही देश को प्रगति के सही रास्ते पर ले जाता है.
-भारत एक्सप्रेस
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