माघ बिहू केवल एक पर्व नहीं, बल्कि असम की आत्मा से जुड़ा उत्सव है. यह त्योहार मेहनत, संतोष और आपसी सौहार्द की भावना को जीवंत करता है. इसी भावना को शब्दों में पिरोते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों को माघ बिहू की शुभकामनाएं दीं.
असमिया संस्कृति की परंपराओं को समेटने वाला पर्व
माघ बिहू के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में देशवासियों, विशेषकर असम के लोगों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि असमिया संस्कृति की सर्वश्रेष्ठ परंपराओं को समेटे यह खूबसूरत पर्व वास्तव में आनंद, सौहार्द और भाईचारे का उत्सव है. प्रधानमंत्री के अनुसार, माघ बिहू केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक जुड़ाव और मानवीय मूल्यों का प्रतीक भी है.
अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने माघ बिहू के मूल भाव संतोष और कृतज्ञता पर विशेष जोर दिया. उन्होंने बताया कि यह पर्व फसल कटाई के मौसम के पूरा होने का प्रतीक है, जब किसानों की महीनों की मेहनत रंग लाती है. यह समय उन सभी लोगों के प्रयासों को सराहने का होता है, जो हमारे जीवन को समृद्ध बनाते हैं, खासकर हमारे मेहनती किसान, जिनकी लगन और परिश्रम से देश का अन्न भंडार भरता है.
आपसी विश्वास और भाईचारे को करता मजबूत
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि माघ बिहू हमें केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि यह हमारे भीतर उदारता और एक-दूसरे की देखभाल करने की भावना को प्रोत्साहित करता है. सामूहिक भोज, मेल-मिलाप और परंपराओं के माध्यम से यह पर्व समाज में आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत करता है. ऐसे त्योहार हमें याद दिलाते हैं कि हमारी सांस्कृतिक परंपराएं हमें एक-दूसरे के और करीब लाती हैं.
सभी के जीवन में शांति और खुशियां लाए
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने कामना की कि माघ बिहू सभी के जीवन में शांति, उत्तम स्वास्थ्य और खुशियां लेकर आए. उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाला वर्ष हर परिवार के लिए समृद्धि और सफलता से भरा हो. उनका संदेश केवल शुभकामनाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी झलकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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