पीएम मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक बेहद प्रेरक संस्कृत सुभाषित शेयर किया. प्रधानमंत्री ने अपनी ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “जब हमारे संकल्प, विचार और मन की भावनाएं एक होती हैं, तब हर कार्य सफल होता है. आइए, एकजुटता के साथ आगे बढ़ें और मिलकर भारतवर्ष के हर लक्ष्य को हासिल करें.
समान संकल्प और एकजुटता का संदेश
पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर यह महत्वपूर्ण संस्कृत श्लोक साझा किया है जिसका अर्थ है हमारे संकल्प समान हों, हमारी सभा एक हो और हमारे हृदय तथा विचारों में पूर्णतः समानता हो. इसी एकता के भाव से मैं आहुति अर्पित करता हूं, जिससे हम मिलकर कार्य करें और सफलता प्राप्त करें.
समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्
समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि
जब हमारे संकल्प, विचार और मन की भावनाएं एक होती हैं, तब हर कार्य सफल होता है। आइए, एकजुटता के साथ आगे बढ़ें और मिलकर भारतवर्ष के हर लक्ष्य को हासिल करें।
समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्।
समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि॥ pic.twitter.com/gR3JZ8ws4J
— Narendra Modi (@narendramodi) June 30, 2026
सम्मान और आपसी भाईचारे पर दिया जोर
इससे पहले बीते दिन सोमवार को भी प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा था, “दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है. इससे आपसी समझ और भाईचारा और मजबूत होता है.” पीएम मोदी ने इस विचार के साथ यह संस्कृत श्लोक साझा किया था.
देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः.
स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति
इसका हिंदी अर्थ होता है कि विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और सामाजिक नियमों को समझने वाले व्यक्ति में उचित-अनुचित का विवेक विकसित हो जाता है. ऐसा व्यक्ति जहां भी जाता है, वहां सम्मान प्राप्त करता है और श्रेष्ठजनों के बीच अपना प्रभाव स्थापित करता है.
26 जून की पोस्ट में क्या कहा था?
इससे पहले 26 जून को भी पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सुभाषित शेयर किया था. उन्होंने यह प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक साझा किया था.
सङ्गच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्
देवा भागं यथा पूर्वे, सञ्जानाना उपासते
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इसका हिंदी अर्थ होता है कि हम सब साथ मिलकर चलें, एक सुर में बोलें और हमारे मन व विचार एक हों. जिस प्रकार प्राचीनकाल में देवता एकमत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते थे, ठीक उसी तरह हमें भी हमेशा एकता और सौहार्द के साथ कार्य करना चाहिए.
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