Ram Mandir SIT Investigation: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान और चंदे में भारी हेराफेरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने मंदिर के डोनेशन मैनेजमेंट सिस्टम में सुरक्षा नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के उल्लंघन का पर्दाफाश किया है, जिसके बाद अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती में नियमों (SOP) की अनदेखी कर लाखों रुपये की चोरी की गई. SIT की जांच में बिना जेब के कपड़े पहनने के नियम का उल्लंघन, गायब सुरक्षा गार्ड, और 180 दिन के बजाय सिर्फ 45 दिन में सीसीटीवी फुटेज मिटाए जाने जैसी बड़ी लापरवाहियां सामने आईं. ट्रस्ट के महासचिव के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव के पास गैरकानूनी रूप से दानपात्रों की चाबियां थीं. इस मामले में मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई त्वरित कार्रवाई के बाद कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से लगभग ₹80 लाख नगद बरामद किए जा चुके हैं.
मैनेजमेंट सिस्टम में भारी लापरवाही (Ram Mandir Donation Counting SOP)
अयोध्या राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे में गड़बड़ी का मामला अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में खुलासा किया है कि मंदिर के डोनेशन मैनेजमेंट सिस्टम में भारी लापरवाही बरती गई. साल 2025 में राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के प्रतिनिधियों द्वारा तय किए गए कड़े नियमों (SOP) की धज्जियां उड़ाई गईं. नोटों की गिनती करने वाले स्टाफ के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनना अनिवार्य था, ताकि कोई पैसा न छिपा सके, लेकिन इस नियम को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया.
जांच में सामने आया कि गिनती वाले कमरे में सुरक्षा चेकिंग और गार्ड्स भी नदारद थे. नियमों के मुताबिक ‘सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज’ (SIS) के गार्ड तैनात रहने थे और हर शख्स की तलाशी होनी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं हो रहा था. इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी बड़ी लापरवाही की गई, जहां फुटेज को 180 दिनों (6 महीने) तक सुरक्षित रखना अनिवार्य था, वहीं उसे महज 45 दिनों में ही मिटा दिया गया.
₹2.5 लाख नकद बरामद (Ram Mandir Donation Scam)
इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला मोड़ राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम आना है. टिन्नू यादव के पास नियमों के खिलाफ जाकर कई दानपात्रों (हुंडियों) की चाबियां थीं, जिनकी मदद से पैसे गायब किए गए. इतना ही नहीं, टिन्नू ने अपने एक रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को भी मंदिर के कैश-काउंटिंग यूनिट में नौकरी पर रखवा दिया था. इस धांधली का खुलासा तब और गहरा गया जब डोनेशन काउंटिंग रूम के पास बने एक बाथरूम से लावारिस हालत में ₹2.5 लाख नकद बरामद हुए.
महासचिव चंपत राय ने आरोपों को खारिज कर दिया
इस मामले में राजनीतिक घमासान भी देखने को मिला. सबसे पहले 7 जून को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने दान में भारी हेराफेरी के आरोप लगाए थे. शुरुआत में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने 13 जून को SIT जांच के आदेश दिए.
SIT ने महज 6 दिनों में जांच पूरी कर 23 जून को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारियां शुरू की गईं. पुलिस ने अब तक मुख्य आरोपी सुभाष श्रीवास्तव (डोनेशन काउंटिंग इन-चार्ज), रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और मनीष कुमार यादव समेत कुल 8 लोगों को गिरफ्तार कर करीब ₹80 लाख कैश और विदेशी मुद्रा बरामद की है.
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-भारत एक्सप्रेस
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