केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने एक दिवसीय झारखंड दौरे के दौरान आरक्षण और राज्य की राजनीति पर बड़ा बयान दिया है. रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिन सरकारी कंपनियों का निजीकरण (Privatization) हो जाता है, उनके प्राइवेट होने के बाद भी उनमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू रहनी चाहिए.
उन्होंने यह भी साफ किया कि निजीकरण की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल में हुई थी, इसलिए इसके लिए मौजूदा केंद्र सरकार को दोष देना गलत है.
‘आरक्षण खत्म करना है तो पहले जाति व्यवस्था खत्म करो’
दिल्ली में उठी आरक्षण समाप्त करने की मांगों पर अठावले ने बेबाकी से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हर वर्ग के जरूरतमंदों को आरक्षण देने का काम किया है.
अठावले ने कहा, ‘आरक्षण बुद्धि का पैमाना नहीं है. SC-ST वर्ग के बच्चों की मेरिट लिस्ट सामान्य वर्ग से बस कुछ ही अंकों से पीछे रहती है. अंतर केवल सुविधाओं का है. जिस दिन देश से जाति व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, उस दिन सरकार आरक्षण खत्म करने पर विचार कर सकती है.’
हेमंत सोरेन सरकार पर साधा निशाना
झारखंड की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन करने वाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन से उनके पुराने और अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उतने सक्रिय नहीं दिखते.
छात्र आंदोलन और लाठीचार्ज: छात्र आंदोलन पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों से संवाद करने के बजाय उन पर लाठियां चलवाईं. बाद में परीक्षाएं रद्द हुईं, जिस पर कोर्ट ने रोक लगाई और माना कि धांधली हुई है.
पलायन रोकने की जरूरत: उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं का पलायन रोकने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से नए उद्योग लगाने चाहिए. अठावले ने दावा किया कि झारखंड में भाजपा की सरकार बनने पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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