पश्चिम बंगाल का आरजी कर मेडिकल कॉलेज बलात्कार और हत्याकांड एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया है. नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत मुखर्जी द्वारा केस की फाइलों को दोबारा खोलने और “ममता राज में सबूतों को सुनियोजित तरीके से नष्ट करने” के गंभीर आरोपों के बाद, अब टीएमसी के ही अपने सांसद कीर्ति आजाद ने दिल्ली में एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने पूरी पार्टी को बैकफुट पर ला दिया है. इस नए मोड़ ने साफ कर दिया है कि अगस्त 2024 में कोलकाता पुलिस की शुरुआती जांच सिर्फ और सिर्फ मामले को रफा-दफा करने की एक नाकाम कोशिश थी.
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद क्या बोले?
इस पूरे मामले पर दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने अपनी ही सरकार के पुराने स्टैंड की धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने जांच की नए सिरे से समीक्षा किए जाने का पूरा समर्थन करते हुए कहा, “हां, बिल्कुल ऐसा किया जाना चाहिए. जो भी दोषी हैं, उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. मैंने कभी इसके उलट बात नहीं कही है. कीर्ति आजाद यहीं नहीं रुके, उन्होंने कोलकाता पुलिस के उस दावे पर भी बड़ा सवाल उठाया जो ममता सरकार को क्लीन चिट दे रही थी.
Delhi: On investigations surrounding the R. G. Kar Medical College and Hospital case, TMC MP Kirti Azad says, “Yes, absolutely it should be done. Those who are guilty should be punished. I have never said otherwise. The Kolkata Police submitted a report within two days, and it… pic.twitter.com/yK5U1ebBRq
— IANS (@ians_india) June 13, 2026
आजाद ने भावुक और तीखे लहजे में कहा कि कोलकाता पुलिस ने दो दिनों के भीतर एक रिपोर्ट सौंप दी थी, और यह सब 62 दिनों तक चलता रहा. हमारी बेटी को भयानक चोटें आई थीं-उसकी खोपड़ी (Skull) तोड़ दी गई थी, उसका पैर तोड़ दिया गया था, उसके सिर पर गंभीर चोटें थीं. यह सब मीडिया में व्यापक रूप से दिखाया गया था.” उन्होंने इस दौरान सीबीआई की रिपोर्टिंग की क्रेडिबिलिटी पर भी सवाल दागे और केंद्रीय एजेंसी से जवाब मांगा.
ममता सरकार की पुलिस पर उठ रहे हैं बड़े सवाल
कीर्ति आजाद का यह बयान इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि टीएमसी के भीतर भी इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार और तत्कालीन कोलकाता पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की थी. नए स्वास्थ्य मंत्री ने पहले ही खुलेआम आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन और कुछ रसूखदार लोगों के एक ‘बड़े नेटवर्क’ ने मिलकर घटनास्थल और शव के साथ छेड़छाड़ की और साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से मिटाया.
जब वारदात हुई थी, तब भाजपा नेता अमित मालवीय सहित पूरे विपक्ष ने आरोप लगाया था कि ममता सरकार अपने कुछ चहेते अधिकारियों को बचाने के लिए इस हैवानियत पर पर्दा डाल रही है, जिसे अब खुद टीएमसी सांसद के बयानों ने हवा दे दी है.
ये भी पढ़ें: अभिषेक के घर सुबह-सुबह पुलिस की दबिश, ममता बनर्जी भी आनन-फानन में मौके पर पहुंचीं
डेढ़ साल बाद खुलेगा अपराधियों का चक्रव्यूह?
अगस्त 2024 की इस खौफनाक रात को आपातकालीन भवन के सेमिनार हॉल में जो कुछ भी हुआ, उसकी गूंज डेढ़ साल बाद साल 2026 में भी उतनी ही तेज है. नए स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पीड़ित लेडी डॉक्टर के माता-पिता से डेढ़ घंटे की सीक्रेट मीटिंग के बाद फाइलों को दोबारा खोलना और सारे नए दस्तावेजों को सीबीआई (CBI) व सीआईडी (CID) को सौंपने का फैसला यह दिखाता है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है.
अपनी ही पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद के इस कबूलनामे के बाद अब ममता बनर्जी के लिए यह जवाब देना मुश्किल हो गया है कि आखिर उनकी पुलिस ने इस बर्बरता को ‘नॉर्मल’ दिखाने की कोशिश क्यों की थी और वो कौन सा ‘महा-नेटवर्क’ है जिसे बचाने के लिए सबूतों की बलि चढ़ा दी गई थी.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




