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पुणे में RSS का ‘पंच परिवर्तन’ महामंत्र! संघ के सरकार्यवाह ने बताया-सोशल मीडिया के इस दौर में कैसे बचेगा आपका परिवार?

RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाळे ने पुणे में आयोजित ‘कुटुंब प्रबोधन’ कार्यक्रम में समाज के लिए ‘पंच परिवर्तन’ का महामंत्र दिया. उन्होंने सोशल मीडिया, टूटते परिवारों और पाश्चात्य अंधानुकरण पर चिंता जताते हुए संस्कार आधारित जीवनशैली पर जोर दिया…

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह मा. श्री. दत्तात्रेय होसबाळे ने पुणे के राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (निसर्ग ग्राम) में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बदलते समय के अनुसार हिंदुत्व और समाज के नए कर्तव्यों को परिभाषित किया है. दरअसल अंतरराष्ट्रीय निसर्गोपचार संस्था (INO) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनंत बिरादार और उनकी धर्मपत्नी पद्मा बिरादार के विवाह के 25वें रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘कुटुंब प्रबोधन’ (परिवार स्नेह मिलन) कार्यक्रम में होसबाळे मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. उन्होंने दो टूक कहा कि आज के दौर में केवल परंपराओं पर गर्व करना काफी नहीं है, बल्कि ‘पंच परिवर्तन’ को अपने जीवन में उतारना ही आज के समय का वास्तविक युगधर्म है.

क्या है दत्तात्रेय का ‘पंच परिवर्तन’ महामंत्र?

सभागार में उपस्थित हजारों परिवारों को संबोधित करते हुए दत्तात्रेय होसबाळे ने कहा कि हिंदुओं का संगठन ही हिंदुत्व का शाश्वत धर्म है, लेकिन आज के बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समाज के सामने नई चुनौतियां हैं. उन्होंने समाज को सशक्त बनाने के लिए पांच स्तंभों का महामंत्र दिया:

सामाजिक समरसता: जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एक सूत्र में पिरोना.

परिवार प्रबोधन: बिखरते परिवारों को बचाना और नई पीढ़ी को संस्कार देना.

पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीना.

स्वबोध (स्वभाव जागरण): अपनी संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान पर गौरव करना.

नागरिक कर्तव्य: देश के कानूनों और नागरिक जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करना.

सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार

आधुनिक जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि आज इंटरनेट और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण इंसानी रिश्तों की आत्मीयता खत्म हो रही है और लोग अपनों के बीच रहकर भी अकेले (एकल परिवार प्रणाली) हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि पैसों और सीमेंट-कंक्रीट से एक आलीशान ‘घर’ तो बनाया जा सकता है, लेकिन ‘परिवार’ केवल आपसी प्रेम, आत्मीयता और विश्वास से ही बनता है.

उन्होंने माता-पिता से आह्वान किया कि वे पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण को छोड़कर अपने बच्चों को संस्कारों का केंद्र बनाएं. इसके साथ ही उन्होंने भाषा के मुद्दे पर स्पष्ट कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा आनी चाहिए. विदेशी भाषाएं जरूर सीखें, लेकिन घर में अपनी मातृभाषा का हीनभावना छोड़ पूरा सम्मान करें.

बिरादार परिवार की हुई सराहना

इस गरिमामयी समारोह में वीरशैव लिंगायत पंचमसाली जगद्गुरु पीठ के जगद्गुरु श्री श्री श्री वचनानंद महास्वामी जी (श्वासगुरु) का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ. स्वामी जी ने 25 वर्ष पूर्व के अपने कठिन साधना काल को याद करते हुए भावुकता से बताया कि कैसे उत्तर भारत में गंभीर बीमारी के दौरान बिरादार दंपत्ति ने पुत्र की तरह उनकी सेवा की थी. उन्होंने इस सेवा भावना को संत बसवेश्वर के ‘दासोह’ (निस्वार्थ सेवा) विचार का जीवंत उदाहरण बताया.

कार्यक्रम में उपस्थित महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील और विधान परिषद सदस्य योगेश टिळेकर ने भी बिरादार परिवार की सराहना करते हुए कहा कि अपने व्यक्तिगत उत्सव को राष्ट्रीय चिंतन और सामाजिक प्रबोधन में बदलकर इस परिवार ने समाज के सामने एक अद्भुत मिसाल पेश की है.

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‘निसर्ग ग्राम’ में गूंजा वंदे मातरम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना से आलंदी की खूबसूरत पहाड़ियों की गोद में विकसित ‘निसर्ग ग्राम’ का विशाल सभागार इस अनोखे पारिवारिक कुंभ का गवाह बना. होसबाळे के ओजस्वी भाषण के बाद पूरा सभागार राष्ट्रभक्ति के रंग में डूब गया. हजारों लोगों ने एक साथ खड़े होकर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” का ऐसा उद्घोष किया जिससे पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा.

कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों और आगंतुकों के लिए विशेष रूप से तैयार ‘प्राकृतिक भोजन’ (निसर्गोपचार आधारित प्राकृतिक आहार) की व्यवस्था की गई थी, जिसने स्वास्थ्य और संस्कृति के इस अनूठे संगम को पूर्णता दी.

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-भारत एक्सप्रेस



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