मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लोगों को हैरान भी किया है और चर्चा का विषय भी बना दिया है. यहां केंद्रीय जेल में पदस्थ एक महिला सहायक जेल अधीक्षक और एक पूर्व कैदी के बीच बने रिश्ते ने आखिरकार शादी का रूप ले लिया. यह मामला इसलिए भी खास बन गया क्योंकि इसमें दो अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग न सिर्फ करीब आए, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक विरोधों के बावजूद एक साथ जीवन शुरू करने का फैसला भी किया.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, महिला अधिकारी फिरोजा खातून सतना केंद्रीय जेल में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर तैनात थीं. उनकी ड्यूटी के दौरान मुलाकात धर्मेंद्र सिंह नाम के एक व्यक्ति से हुई, जो हत्या के एक मामले में सजा काट चुके थे और जेल में वारंट से जुड़े कामों में सहयोग करते थे. कामकाज के दौरान दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे यह जान-पहचान दोस्ती में बदल गई. समय के साथ यह रिश्ता गहराता चला गया और दोनों ने एक-दूसरे को समझना शुरू किया.
परिवार और समाज से अलग लिया फैसला
बताया जा रहा है कि दोनों ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का निर्णय परिवार की सहमति के बिना लिया. परिवार की असहमति के कारण महिला अधिकारी के परिजन इस शादी में शामिल नहीं हुए. इसके बावजूद दोनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ विवाह करने का फैसला किया. शादी छतरपुर के लवकुशनगर में हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई.
इस विवाह में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया, जहां स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने भी इस शादी में सहयोग किया. बताया जाता है कि कन्यादान की रस्म सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में संपन्न हुई. शादी के दौरान माहौल सामान्य और पारंपरिक रहा.
जेल परिसर में बनी चर्चा का विषय
जैसे ही यह खबर सामने आई, सतना केंद्रीय जेल परिसर में यह मामला चर्चा का विषय बन गया. कुछ लोग इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और साहस का उदाहरण मान रहे हैं, वहीं कुछ ने इसे लेकर अलग राय भी रखी है. हालांकि, दोनों ने समाज की प्रतिक्रियाओं की परवाह किए बिना अपने रिश्ते को नया नाम देने का फैसला किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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