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शहडोल में इंतहा का अंजाम! सजा सुनते ही बौखलाया सीरियल रेपिस्ट, टीन से रेता खुद का गला

Shahdol Jail News: शहडोल के एक खूंखार रेपिस्ट को दोबारा आजीवन कारावास (पॉक्सो एक्ट) की सजा मिली तो उसने खौफनाक कदम उठा लिया. उसके बैरक की चादर खून से लाल हो गई थी. जानिए आखिर क्या-क्या हुआ?

Shahdol Jail News

Shahdol Jail News: शहडोल/अनिल पांडे: समाज में कैसे-कैसे खूंखार दरिंदे खुलेआम घूम रहे हैं और जेल की सुरक्षा व्यवस्था में कितनी बड़ी खामियां हो सकती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण मध्य प्रदेश के शहडोल से सामने आया है. यहां जिला जेल में आजीवन कारावास की सजा पाए एक बंदी पंकज कटारे ने धारदार टीन के टुकड़े से अपना ही गला काटकर आत्महत्या की खौफनाक कोशिश की. यह घटना सिर्फ एक कैदी के सुसाइड की नहीं है, बल्कि यह माता-पिता के लिए एक कड़ा अलर्ट है.

सजा काटने के बाद किया घिनौना काम

यह मामला हर माता-पिता को सावधान करने वाला है. जानकारी के अनुसार, पंकज कटारे कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि एक आदतन (सीरियल) रेपिस्ट है. वह पहले भी दुष्कर्म के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट चुका है. करीब एक साल पहले ही वह जेल से रिहा होकर बाहर आया था. लेकिन जेल से छूटने के बाद भी उसकी मानसिकता नहीं बदली. उसने समाज में आते ही पांडवनगर क्षेत्र में एक सुनसान घर में एक छात्रा को फिर से अपनी हवस का शिकार बनाया और दोबारा सलाखों के पीछे पहुंच गया.

सजा सुनते ही तनाव में आया

मंगलवार को जब अदालत ने इस खूंखार दरिंदे को दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दोबारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई, तो वह मानसिक तनाव में आ गया. बुधवार सुबह जब जेल के सुरक्षाकर्मी बैरक खोलने पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए.

बंदी की चादर पर खून के गहरे निशान थे. सुरक्षाकर्मियों ने पास जाकर देखा तो पंकज कटारे के हाथ में टीन की चादर का एक छोटा और बेहद नुकीला टुकड़ा था, जिससे वह बेरहमी से अपना गला काट रहा था.

जेल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने शहडोल जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि कड़ी सुरक्षा वाली जेल की बैरक के अंदर इस कैदी के पास टीन का नुकीला और धारदार टुकड़ा कैसे पहुंचा? सजायाफ्ता और मानसिक रूप से तनावग्रस्त कैदियों पर रात के समय उचित निगरानी क्यों नहीं रखी गई?

गले में लगे चार टांके

सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे रोका और आनन-फानन में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे. सर्जन डॉ. अपूर्व पांडे ने उसका उपचार किया. बंदी के गले में गहरा घाव था, जिस पर 4 टांके लगाए गए हैं. फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.

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जेलर सुनील बैशवाड़े ने बताया कि यह कैदी पिछले एक साल से जेल में बंद था. उसके जघन्य अपराधों के कारण उसके परिवार और परिजनों ने भी उससे पूरी तरह नाता तोड़ लिया था. एक साल में न तो कोई उससे मिलने आया और न ही किसी ने उसके लिए वकील किया. इसी अलगाव और दोबारा उम्रकैद की सजा ने उसे यह खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया.



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