Yamuna Water MoA: दशकों पुराना यमुना जल विवाद अब पूरी तरह सुलझ गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इस ऐतिहासिक यमुना जल परियोजना के ‘मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (MoA) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. इस मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गारंटी’ को पूरा करने वाला कदम बताया और कहा कि शेखावाटी की प्यास बुझाने का जो वादा उन्होंने किया था, वह अब धरातल पर सच होने जा रहा है.
कांग्रेस पर ‘विश्वासघात’ का आरोप
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शेखावाटी तक यमुना का पानी लाने की मांग करीब 32 साल पुरानी है. साल 1994 में स्वर्गीय भैरोंसिंह शेखावत की सरकार के समय इसकी उम्मीद बंधी थी, लेकिन उसके बाद कांग्रेस की राजनीति और ‘विश्वासघात’ के कारण राजस्थान इस पानी से महरूम रहा.
सीएम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को सिर्फ लटकाने और भटकाने का काम किया, यहां तक कि हरियाणा चुनाव में अपने घोषणा-पत्र में इस समझौते को रद्द करने तक की बात कह दी थी. लेकिन जनता ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने आते ही सिर्फ दो महीनों के भीतर 17 फरवरी 2024 को त्रिपक्षीय एमओयू किया था, जो अब ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के प्रयासों से हकीकत बन रहा है.
पाइपलाइन से आएगा पानी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत हथिनीकुंड बैराज से जुलाई से अक्टूबर के बीच आवंटित होने वाले यमुना जल को एक विशाल भूमिगत पाइपलाइन के जरिए चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों तक पहुंचाया जाएगा. इससे क्षेत्र को 577 एमसीएम पानी पीने और अन्य जरूरतों के लिए मिलेगा.
योजना के दूसरे चरण में चुरू के 35 हजार हेक्टेयर और झुंझुनूं के 70 हजार हेक्टेयर यानी कुल 1 लाख 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा. इसके अलावा, हिमाचल और उत्तराखंड में बन रहे रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ बांधों के पूरा होने पर राजस्थान को 201 एमसीएम अतिरिक्त पानी मिलेगा, जिससे साल के बाकी दिनों में भी शेखावाटी को पानी की किल्लत नहीं होगी.
-भारतत एक्सप्रेस
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