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उल्टी, पेट दर्द और 100 से ज्यादा तड़पते बच्चे, इंदौर के शिशु कुंज स्कूल में बड़े कांड से हड़कंप

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित शिशु कुंज स्कूल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर परोसे गए खाने से 100 से अधिक बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए हैं. परिजनों का हंगामा जारी है, खाद्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है.

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मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद डरा देने वाली खबर सामने आई है. शहर के जाने-माने और पॉश इलाके झलारिया स्थित शिशु कुंज स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान मासूम बच्चों को ऐसा खाना परोसा गया, जिसने 100 से ज्यादा बच्चों की हालत खराब कर दी है! ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के मौके पर हुए इस आयोजन के बाद बच्चों को भयानक रूप से फूड प्वाइजनिंग हो गई, जिसके बाद स्कूल परिसर में परिजनों ने भारी हंगामा खड़ा कर दिया है.

योग के बाद परोसा गया ‘जहरीला’ खाना

शनिवार को योग दिवस के अवसर पर स्कूल में एक खास कार्यक्रम रखा गया था. इसके बाद स्कूल के मेस (Mess) की तरफ से बच्चों को भोजन दिया गया. लेकिन खाना खाते ही कुछ ही घंटों में बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. मासूम बच्चे अचानक पेट दर्द, उल्टी और मतली (Nausea) से तड़पने लगे. शुरुआत में 35 बच्चों के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन को ई-मेल कर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन देखते ही देखते यह आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया!

उठा ‘क्वालिटी’ पर सवाल

इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की हालत बिगड़ते देख अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. भड़के हुए परिजनों ने स्कूल के बाहर भारी हंगामा काटा और स्कूल प्रबंधन पर खाने की ‘क्वालिटी’ और साफ-सफाई (Hygiene) को लेकर तीखे सवाल दाग दिए. मोटी फीस देने के बावजूद बच्चों को ऐसा खाना परोसना स्कूल की साख पर एक बहुत बड़ा दाग लगा गया है.

लेबोरेटरी गए खाने के सैंपल

मामले ने तूल पकड़ा तो जिला प्रशासन तुरंत एक्शन में आ गया. हंगामे की खबर मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और खाद्य विभाग (Food Department) की टीम दलबल के साथ शिशु कुंज स्कूल पहुंच गई. अधिकारियों ने स्कूल के मेस का चप्पा-चप्पा छाना और वहां तैयार किए गए भोजन के सैंपल (Samples) जब्त कर लिए हैं. इन सैंपलों को जांच के लिए सीधे लेबोरेटरी भेजा गया है, ताकि पता चल सके कि खाने में आखिर कौन सी गड़बड़ी थी.

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दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई?

फिलहाल, बीमार हुए सभी बच्चों का उपचार चल रहा है और प्रशासन उनकी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है. अभिभावकों ने एक सुर में मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए. अब देखना यह है कि लैब की रिपोर्ट में क्या चौंकाने वाला सच बाहर आता है और क्या प्रशासन इस लापरवाही पर कोई बड़ा ‘एक्शन’ लेगा.



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